Indian Bank: ₹1.5 लाख करोड़ के गोल्ड लोन का लक्ष्य, Q1 में प्रॉफिट में 10% की बढ़त

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Bank: ₹1.5 लाख करोड़ के गोल्ड लोन का लक्ष्य, Q1 में प्रॉफिट में 10% की बढ़त

Indian Bank ने इस फाइनेंशियल ईयर में अपने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो को **₹1.5 लाख करोड़** से ऊपर ले जाने की योजना बनाई है। इसके लिए बैंक बड़े वॉल्यूम पर फोकस करेगा। वहीं, बैंक के Q1 मुनाफे में **10%** की बढ़ोतरी हुई है और उसने विदेशी बॉन्ड से **$400 मिलियन** जुटाए हैं।

गोल्ड लोन में भारी विस्तार की तैयारी

Indian Bank ने चालू वित्त वर्ष में अपने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो को ₹1.5 लाख करोड़ के पार ले जाने का ऐलान किया है। अभी बैंक का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब ₹1.25 लाख करोड़ है। बैंक अब पिछली बार की तरह सिर्फ सोने की वैल्यू पर निर्भर रहने के बजाय, ज्यादा से ज्यादा लोन वॉल्यूम (यानी सोना) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

यह रणनीति ऐसे समय में आई है जब बैंकिंग सेक्टर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। पिछले साल बैंक की गोल्ड लोन बुक में 30% की वृद्धि हुई थी, जिसका बड़ा श्रेय सोने की बढ़ती कीमतों को जाता है। लेकिन इस बार, बैंक का लक्ष्य गोल्ड लोन सेगमेंट में 20% की ग्रोथ हासिल करना है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को जोड़ना और गिरवी रखे गए सोने की कुल मात्रा को बढ़ाना शामिल है।

तिमाही नतीजे और डिपॉजिट्स

वित्तीय मोर्चे पर, Indian Bank ने FY27 की पहली तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में 10.09% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो कि ₹3,273 करोड़ रहा। बैंक का लोन मिक्स भी संतुलित है, जिसमें RAM सेगमेंट (रिटेल, एग्रीकल्चर और छोटे बिजनेस लोन) कुल लोन बुक का 65% है, जबकि कॉर्पोरेट लोन 35% का हिस्सा है। डिपॉजिट्स भी स्थिर दिख रहे हैं, जिसमें CASA (करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट) डिपॉजिट्स कुल डिपॉजिट बेस का लगभग 40% हैं।

विदेशी बॉन्ड से फंड जुटाया

अपनी फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए, Indian Bank ने GIFT सिटी ब्रांच के जरिए चार साल के बॉन्ड जारी कर $400 मिलियन सफलतापूर्वक जुटाए हैं। यह 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजारों से $1 बिलियन जुटाने के बड़े प्लान का हिस्सा है। इसके अलावा, बैंक ने $1.5 बिलियन के फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स भी आकर्षित किए हैं, जिसका लक्ष्य 31 अगस्त तक $2 बिलियन तक पहुंचना है। इससे पता चलता है कि नॉन-रेजिडेंट भारतीय निवेशकों में काफी दिलचस्पी है।

निवेशकों के लिए जोखिम

इस विस्तार के बावजूद, निवेशकों को कुछ खास जोखिमों के प्रति सचेत रहना चाहिए। गोल्ड लोन का कारोबार सोने की कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। सोने की कीमतों में तेज गिरावट आने पर बैंक को लोन-टू-वैल्यू (LTV) लिमिट को सख्ती से मैनेज करना पड़ सकता है। अगर कर्जदार भुगतान नहीं कर पाते हैं तो इससे मार्जिन कॉल या एसेट क्वालिटी की चिंताएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, गोल्ड लोन मार्केट में नए और आक्रामक खिलाड़ियों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जो ब्याज मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।

ऑपरेशनल जोखिम भी एक महत्वपूर्ण कारक हैं। गोल्ड लोन के लिए देश भर में एक बड़े फिजिकल ब्रांच नेटवर्क को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन की आवश्यकता होती है। आगे चलकर, निवेशकों को प्रतिस्पर्धी माहौल में बैंक की NIMs (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) बनाए रखने की क्षमता, विदेशी फंडिंग लक्ष्यों की प्रगति और RAM सेगमेंट की ग्रोथ पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.