भारत में ऑडिट फर्म अब मैनुअल लेजर चेक की जगह डेटा-संचालित ऑटोमेशन अपना रही हैं। KPMG Clara और Deloitte Omnia जैसे प्लेटफॉर्म्स की मदद से पूरा डेटासेट चेक करना संभव हो गया है, लेकिन रेगुलेटर्स ने स्पष्ट किया है कि अंतिम जिम्मेदारी अभी भी इंसानी ऑडिटर की ही होगी।
भारत का ऑडिटिंग सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब मैनुअल तरीके से सैंपल चेक करने के बजाय, बड़ी ऑडिट फर्म्स 'AI एजेंट्स' का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे न केवल पूरा लेजर स्कैन करना आसान हो गया है, बल्कि खामियों और धोखाधड़ी को पकड़ने की रफ्तार भी कई गुना बढ़ गई है।
प्रमुख प्लेटफॉर्म्स और तकनीक
ग्लोबल ऑडिट कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर अपने टेक्नोलॉजी टूल्स का विस्तार कर रही हैं।
- Deloitte: अपना 'Omnia' प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर रही है।
- KPMG: 'KPMG Clara' के जरिए लगातार डेटा मॉनिटरिंग कर रही है।
- EY: अपने एश्योरेंस बिजनेस में लाखों जनरल एंट्रीज को प्रोसेस करने के लिए AI को स्केल कर रही है।
2026 के डेटा के अनुसार, ज्यादातर बड़ी फर्म्स या तो AI को अपनी मुख्य रणनीति का हिस्सा बना चुकी हैं या इसका परीक्षण कर रही हैं।
रेगुलेटरी गाइडलाइन्स और जवाबदेही
नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA) और Comptroller and Auditor General (CAG) ने साफ कर दिया है कि AI का इस्तेमाल इंसानी विवेक (Human Judgment) की जगह नहीं ले सकता। अगर AI कोई गलती करता है या किसी फ्रॉड को नहीं पकड़ पाता, तो इसकी पूरी कानूनी जिम्मेदारी उस इंसान की होगी जिसने ऑडिट साइन किया है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risks)
तकनीकी बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी आई हैं:
- Hallucination Risk: AI मॉडल गलत डेटा को भी भरोसेमंद तरीके से पेश कर सकते हैं।
- Data Governance: संवेदनशील डेटा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- Cybersecurity: साइबर हमले या मैलिशियस डेटा इंजेक्शन से ऑडिट रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल उठ सकते हैं।
SEBI समेत अन्य रेगुलेटर्स अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि AI कैसे निष्कर्षों तक पहुंचता है, इसकी पारदर्शिता अनिवार्य होनी चाहिए। अब ICAI भी अपने करिकुलम को अपडेट कर रहा है ताकि भविष्य के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स AI-संचालित माहौल में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें।
