महिलाओं के लिए क्रेडिट की दुनिया में बड़ा बदलाव
यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का एक बड़ा संकेत है। खास तौर पर बिजनेस लोन (business loan) में आई तेजी, महिलाओं के बढ़ते एंटरप्रेन्योरशिप (entrepreneurship) और आर्थिक सशक्तिकरण को दर्शाती है।
कर्ज में भारी उछाल, बिजनेस लोन की हिस्सेदारी बढ़ी
महिलाओं के क्रेडिट पोर्टफोलियो का आकार 2017 में जहां सिर्फ ₹16 लाख करोड़ था, वहीं 2025 तक इसके ₹76 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह महत्वपूर्ण है कि अब कुल क्रेडिट का 26% हिस्सा महिलाओं के पास है। खास बात यह है कि अब पर्सनल लोन (personal loan) के मुकाबले बिजनेस लोन का हिस्सा बढ़ा है। जहां 2017 में महिलाओं के कुल लोन का 16% बिजनेस लोन था, वहीं अब यह बढ़कर 25% हो गया है। वहीं, पर्सनल लोन का हिस्सा 77% से घटकर 71% रह गया है। महिलाओं को दिए गए बकाया बिजनेस लोन का मूल्य 7.5 गुना बढ़ गया है।
बेहतर रीपेमेंट और डिजिटल एक्सेस से मिली रफ्तार
इस ग्रोथ की एक बड़ी वजह महिलाओं की बेहतर रीपेमेंट (repayment) क्षमता है। आंकड़ों के मुताबिक, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लोन डिफॉल्ट रेट (loan default rate) कम हैं – 2.8% की तुलना में पुरुषों का 3.3% है। इसी वजह से 2020 से 2025 के बीच महिलाओं के क्रेडिट में सालाना औसतन 14.2% की ग्रोथ देखी गई, जो पुरुषों की 8.2% ग्रोथ से काफी ज्यादा है। डिजिटल माध्यमों (digital mediums) ने भी लोन के लिए अप्लाई करने और उन्हें मैनेज करने की प्रक्रिया को आसान बनाकर, महिलाओं की औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच को तेज करने में एक अहम भूमिका निभाई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि लोन अप्रूवल (loan approval) भी पहले से तेज हो गए हैं, जहां 2022 में 34% कंज्यूमर लोन उसी दिन अप्रूव होते थे, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा 45% तक पहुंच गया है।
चुनौतियां अभी भी मौजूद
हालांकि, इस प्रगति के बावजूद कुछ बड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। महिलाओं में वित्तीय समझ का स्तर काफी कम है; केवल 21% महिलाएं बुनियादी वित्तीय ज्ञान रखती हैं और सिर्फ 13% ही वित्तीय जोखिमों और महंगाई (inflation) के बारे में सामान्य सवालों का जवाब दे पाती हैं। डिजिटल साधनों का इस्तेमाल भी पुरुषों (35%) के मुकाबले महिलाओं में कम (28%) है। महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों (women-led businesses) को अभी भी पर्याप्त फंडिंग (funding) हासिल करने में संघर्ष करना पड़ता है, जिसके लिए $11.4 बिलियन से अधिक की कमी है। छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए मिलने वाले क्रेडिट का सिर्फ 7% ही महिला-संचालित व्यवसायों को मिलता है। साथ ही, पुरुषों के ₹11.6 लाख के मुकाबले महिलाओं के लिए औसत बिजनेस लोन सिर्फ ₹5.3 लाख है, जो उनके व्यवसायों को बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है। कई सरकारी सहायता कार्यक्रमों के बारे में भी जागरूकता की भारी कमी है।
आगे का रास्ता: अवसरों की ओर
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में महिलाओं के लिए क्रेडिट की पहुंच का विस्तार जारी रहेगा, क्योंकि लगभग 45 करोड़ महिलाएं लोन लेने की योग्य हैं। लेंडर्स (lenders) अब महिलाओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली (formal financial system) में उनकी समग्र भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि ग्रोथ व्यापक है, लेकिन हाउसिंग फाइनेंस (housing finance) जैसे क्षेत्रों में जहां 69% नए लोन महिलाओं को मिल रहे हैं, वह उनकी बढ़ती वित्तीय ताकत और स्वतंत्रता का संकेत देता है। महिलाओं की आर्थिक शक्ति का पूरी तरह से लाभ उठाने और तेज क्रेडिट ग्रोथ से जुड़े जोखिमों को प्रबंधित करने के लिए, वित्तीय शिक्षा और महिला उद्यमियों के लिए विशेष सहायता पर निरंतर काम करना महत्वपूर्ण होगा।