भारत का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर तेजी से बदल रहा है। Emkay की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मार्केट 2025 के **$171 बिलियन** से बढ़कर 2034 तक **$436 बिलियन** के स्तर पर पहुंच जाएगा, जो **10.6%** की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट को दर्शाता है।
अगले एक दशक में भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट इंडस्ट्री अपनी साइज को दोगुना से भी ज्यादा करने की ओर बढ़ रही है। Emkay Wealth Management की रिपोर्ट बताती है कि देश में बढ़ती आय और बचत के तौर-तरीकों में आए बदलाव के कारण यह क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा।
क्यों बढ़ रहा है यह मार्केट?
सालों तक भारतीय परिवारों ने अपनी संपत्ति को गोल्ड (Gold), रियल एस्टेट और बैंक डिपॉजिट जैसे फिजिकल एसेट्स में ही रखा। लेकिन अब यह पैसा तेजी से इक्विटी, म्यूचुअल फंड और प्रोफेशनल मैनेज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की ओर शिफ्ट हो रहा है। यह बदलाव केवल बड़े रईसों तक सीमित नहीं है, बल्कि 'मास-एफ्लुएंट' (mass-affluent) निवेशक भी अब प्रोफेशनल सलाह लेना पसंद कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने निवेश को बेहद आसान और सस्ता बना दिया है।
बदलती पसंद और नए विकल्प
अमीर निवेशक अब पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए नए रास्तों की तलाश कर रहे हैं। इसमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज, प्राइवेट क्रेडिट और प्री-IPO अवसर शामिल हैं। इसके अलावा, 'फैमिली ऑफिस' का कॉन्सेप्ट भी तेजी से बढ़ रहा है जो वेल्थ ट्रांसफर और गवर्नेंस जैसे जटिल मुद्दों पर काम कर रहे हैं। वहीं, रिस्क कम करने के लिए GIFT IFSC के जरिए विदेश में निवेश करना भी अब एक सामान्य रणनीति बनती जा रही है।
चुनौतियां भी कम नहीं
भले ही आउटलुक पॉजिटिव है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती है। फिक्स्ड इनकम में भी निवेशक अब लंबी अवधि के बजाए 'परफॉर्मिंग-क्रेडिट' स्ट्रेटेजीज को तरजीह दे रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि बदलते मार्केट साइकल में अल्टरनेटिव एसेट्स कैसा परफॉर्म करते हैं।
