क्यों अहम है डेटा में पारदर्शिता?
इंश्योरेंस Surety Bonds और Private Credit को भारत की क्रेडिट रिपोर्टिंग सिस्टम में शामिल करना बेहद जरूरी है। इन इंस्ट्रूमेंट्स पर सही जानकारी न होने से वित्तीय स्थिरता पर खतरा मंडरा सकता है। Lenders को चिंता है कि मौजूदा क्रेडिट सिस्टम में उधारकर्ताओं (Borrowers) के कुल Leverage का पूरा अंदाजा नहीं लग पा रहा है, खासकर ऐसे वक्त में जब ये इंस्ट्रूमेंट्स तेजी से बढ़ रहे हैं।
डेटा गैप्स को दूर करने की पहल
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) इंश्योरेंस Surety Bonds और Private Credit में रिपोर्टिंग से जुड़ी अहम खामियों को दूर करेंगे। Lenders ने साफ किया है कि ये इंस्ट्रूमेंट्स क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (CICs) द्वारा ठीक से ट्रैक नहीं हो पा रहे हैं। इससे कंटीजेंट लायबिलिटीज (आकस्मिक देनदारियों) और उधारकर्ताओं के Leverage का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता है। IRDAI की 2022 की गाइडलाइंस के बावजूद, इन कॉन्ट्रैक्ट्स को व्यापक क्रेडिट रिपोर्टिंग में एकीकृत करना एक चुनौती बनी हुई है।
बाजार की रफ्तार, रेगुलेटर की चिंता
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इंश्योरेंस Surety Bonds का बाजार ₹10,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। अकेले नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुलाई 2025 तक करीब ₹10,369 करोड़ का अनुमान है। बाजार को 2025 के अंत तक ₹60,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह तेजी सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं से जुड़ी है। वहीं, Private Credit, जो अक्सर अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के जरिए होता है, वह भी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सेंट्रल रिपॉजिटरी ऑफ इन्फॉर्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स (CRILC) को इसकी व्यापक रिपोर्टिंग नहीं हो रही है।
FSDC की अहम बैठक
इन रिपोर्टिंग गैप्स पर फाइनेंसियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल (FSDC) में चर्चा होगी। यह काउंसिल रेगुलेटर्स के बीच तालमेल बिठाती है। वित्त मंत्री की अगुआई वाली इस काउंसिल में SEBI और PFRDA जैसे रेगुलेटर भी शामिल हैं। FSDC का मकसद वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना और उभरते जोखिमों का प्रबंधन करना है। Surety Bonds और Private Credit में पारदर्शिता की कमी एक बड़ी चिंता है, जिससे वित्तीय क्षेत्र के जोखिम और सिस्टमैटिक Leverage छिप सकते हैं। नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड (NeSL) इलेक्ट्रॉनिक इंश्योरेंस Surety Bonds (e-ISB) विकसित कर रहा है ताकि रिपोर्टिंग को आसान बनाया जा सके।
विश्लेषकों की चेतावनी
विश्लेषक डेटा की इस अस्पष्टता से सिस्टमैटिक रिस्क को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि जहां पारदर्शिता जरूरी है, वहीं छोटे व्यवसायों पर कंप्लायंस का बोझ बढ़ सकता है। FSDC का समन्वय और रेगुलेटर्स द्वारा व्यावहारिक, व्यापक रिपोर्टिंग लागू करने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। समय पर डेटा की कमी से जोखिम का गलत मूल्यांकन हो सकता है और कुछ बाजार सेगमेंट के लिए कैपिटल की लागत प्रभावित हो सकती है।
डेटा एकत्रीकरण और रेगुलेटरी रफ्तार
क्रेडिट डेटा का बिखरा हुआ होना सबसे बड़ी कमजोरी है। CICs मुख्य रूप से पारंपरिक लोन को कवर करते हैं, लेकिन Surety Bonds जैसी ऑफ-बैलेंस शीट देनदारियों को छोड़ देते हैं। CRILC की एक सीमा (₹5 करोड़ की ऐतिहासिक सीमा) है, जो कई छोटे Private Credit सौदों को कवर नहीं कर पाती। इस चयनात्मक रिपोर्टिंग का मतलब है कि छिपा हुआ Leverage उम्मीद से ज्यादा हो सकता है, जिससे छिपे हुए सिस्टमैटिक जोखिम पैदा हो सकते हैं।