📈 मुनाफे में तेज़ी, एसेट्स में बढ़त: ISFC के नतीजे
India Shelter Finance Corporation Limited (ISFC) ने अपने Q3FY26 के नतीजे पेश कर दिए हैं, और कंपनी के आंकड़े निवेशकों को खुश करने वाले हैं। खास तौर पर, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 33% की छलांग लगाकर ₹128 करोड़ पर पहुंच गया। यह तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) के हिसाब से भी 5% की बढ़ोतरी है। वहीं, पूरे नौ महीनों (9MFY26) की बात करें तो PAT 37% बढ़कर ₹369 करोड़ रहा।
लोन बुक में ज़बरदस्त उछाल
कंपनी की लोन बुक भी तेज़ी से बढ़ी है। ग्रॉस मैनेज्ड एसेट्स (GMA) में पिछले साल की तुलना में 31% का ज़बरदस्त इजाफ़ा हुआ और यह ₹10,365 करोड़ तक पहुंच गया। इस दौरान डिस्पर्समेंट (Disbursements), यानी बांटे गए लोन, 11% बढ़कर ₹977 करोड़ पर रहे, जो बाज़ार में कंपनी के प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग को दर्शाता है।
कॉस्ट कंट्रोल और बेहतर मार्जिन
ISFC ने अपनी कॉस्ट पर भी अच्छी पकड़ बनाए रखी है। कॉस्ट ऑफ फंड्स (Cost of Funds) में 20 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कमी आई और यह 8.3% पर आ गया। इससे कंपनी का नेट इंटरेस्ट स्प्रेड (Net Interest Spread) भी 20 bps बढ़कर 6.6% हो गया। वहीं, ऑपरेशनल एक्सपेंस (Opex), एसेट्स के मुकाबले 4.0% पर स्थिर रहा, जो कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दिखाता है।
एसेट क्वालिटी और ब्रांच विस्तार
कंपनी की एसेट क्वालिटी भी मजबूत बनी हुई है। ग्रॉस स्टेज 3 एसेट्स 1.5% और नेट स्टेज 3 एसेट्स 1.2% पर रहे, जो कंपनी के रिस्क मैनेजमेंट को दर्शाता है।
मैनेजमेंट इस प्रदर्शन से खुश है और कंपनी अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर आगे बढ़ रही है। ब्रांच नेटवर्क का लगातार विस्तार करना कंपनी की एक अहम पहल है। Q3FY26 में 2 नई ब्रांचेज खोली गईं, जिससे कुल ब्रांचेज की संख्या 301 हो गई है। साल की शुरुआत से अब तक 35 नई ब्रांचेज खुल चुकी हैं। ISFC का बिज़नेस मॉडल टियर 2 और टियर 3 शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग लोन और प्रॉपर्टी पर लोन देने पर केंद्रित है, खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के ग्राहकों के लिए।
आगे की राह और जोखिम
हालांकि, इस शानदार नतीजों के साथ, निवेशकों को कंपनी के लीवरेज लेवल्स पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, ISFC जैसी NBFC के लिए इंटरेस्ट रेट सेंसिटिविटी एक स्थायी जोखिम बना रहता है, हालांकि कॉस्ट ऑफ फंड्स में सुधार इस पर प्रभावी मैनेजमेंट को दर्शाता है। कंपनी की भविष्य की ग्रोथ टियर 2 और टियर 3 शहरों में अपनी ब्रांच विस्तार की रणनीति को कितनी अच्छी तरह लागू करती है, इस पर निर्भर करेगी। अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में ISFC की पैठ, भारत में बढ़ती हाउसिंग डिमांड का फायदा उठाने में मदद कर सकती है।