📊 कंपनी के तिमाही नतीजे और आगे की योजना
ISFC ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही और पहले नौ महीनों के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी ने लगातार ग्रोथ का प्रदर्शन किया है।
💪 शानदार प्रदर्शन के आंकड़े
- Q3 FY26 का हाल: कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 28.14% बढ़कर ₹389.74 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह, नेट प्रॉफिट (PAT) में 29.05% की तेजी देखी गई और यह ₹124.07 करोड़ दर्ज किया गया।
- 9 महीने (9M FY26) का प्रदर्शन: 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों में, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 33.63% बढ़कर ₹1120.16 करोड़ रहा। इसी अवधि में, कंसोलिडेटेड PAT में 35.52% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹365.56 करोड़ पर पहुंच गया।
- EPS: नौ महीनों के लिए बेसिक EPS ₹33.79 दर्ज किया गया।
🏛️ एसेट क्वालिटी और कॉर्पोरेट एक्शन
कंपनी ने अपनी एसेट क्वालिटी को भी मजबूत बनाए रखा है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात 1.54% रहा, जबकि नेट NPA अनुपात 1.16% पर स्थिर रहा। स्टेज 3 एसेट्स पर प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR) 24.86% रहा, जो एक मजबूत स्थिति दर्शाता है।
नई लेबर कोस्ट के लागू होने से Q3 FY26 में ₹4.5 करोड़ का अतिरिक्त लायबिलिटी दर्ज हुई, जिसका कंपनी की कुल प्रॉफिटेबिलिटी पर मामूली असर पड़ा।
रणनीतिक रूप से, ISFC के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹1000 करोड़ तक की राशि नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए जुटाने की मंजूरी दी है। यह फंड कंपनी के कैपिटल बेस को मजबूत करेगा और ग्रोथ को सपोर्ट करेगा।
एक महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट गवर्नेंस डेवलपमेंट में, बोर्ड ने प्रमोटर (Promoter) श्री अनिल मेहता और अन्य सदस्यों की 'प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप' श्रेणी से 'पब्लिक' श्रेणी में पुनर्वर्गीकरण (Reclassification) के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। इस पर नियामक और शेयरधारकों की मंजूरी बाकी है।
💰 वित्तीय मजबूती
कंपनी की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है। 31 दिसंबर, 2025 तक, डेट-इक्विटी रेशियो 1.85 गुना और लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 133.08% रहा। सिक्योर किए गए लिस्टेड NCDs पर सिक्योरिटी कवर 110% पर बना हुआ है।
🚩 आगे का रास्ता और जोखिम
हालांकि कंपनी के नतीजे मजबूत हैं, लेकिन निवेशक ₹1000 करोड़ के NCD इश्यू के क्रियान्वयन और उसकी लागत पर बारीकी से नजर रखेंगे। प्रमोटरों का पुनर्वर्गीकरण एक प्रक्रियात्मक कदम है, जिस पर आगे की मंजूरी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों की निगरानी करनी होगी। रेवेन्यू और PAT में लगातार बढ़ोतरी और स्थिर एसेट क्वालिटी ISFC के लिए अनुकूल स्थिति बनाती है, लेकिन NBFC सेक्टर के लिए मार्केट की अनिश्चितताएं और रेगुलेटरी बदलाव हमेशा जोखिम बने रहेंगे।