Securitisation Market: भारत में बनी नई हिस्ट्री, पहली छमाही में वॉल्यूम पहुंचा **₹1.47 लाख करोड़** के पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Securitisation Market: भारत में बनी नई हिस्ट्री, पहली छमाही में वॉल्यूम पहुंचा **₹1.47 लाख करोड़** के पार

भारत का सिक्युरिटाइजेशन मार्केट पहली छमाही (H1 FY27) में **42%** उछलकर **₹1.47 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। गोल्ड और व्हीकल लोन की बढ़ती मांग ने इसे नई ऊंचाई दी है।

भारत के फाइनेंशियल सेक्टर में सिक्युरिटाइजेशन का मार्केट नए शिखर पर है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में कुल वॉल्यूम ₹1.47 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 42% ज्यादा है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कैसे NBFCs अपने कैश फ्लो और लोन पोर्टफोलियो को मैनेज करने के लिए इस रास्ते को तेजी से अपना रही हैं।

सिक्युरिटाइजेशन क्या है और क्यों जरूरी है?

निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि NBFCs कैसे काम करती हैं। आसान भाषा में कहें तो, सिक्युरिटाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें NBFC अपने लोन (जैसे व्हीकल या पर्सनल लोन) के बंडल को बैंकों या अन्य निवेशकों को बेच देती हैं। इससे NBFC को तुरंत कैश मिल जाता है, जिसे वे नए लोन देने में लगा सकती हैं। यह रणनीति NBFCs के बैलेंस शीट को हल्का रखती है और बिजनेस ग्रोथ के लिए फंड की सप्लाई बनाए रखती है।

तेजी के मुख्य कारण

मार्केट में यह उछाल मुख्य रूप से गोल्ड लोन और व्हीकल लोन सेगमेंट की बदौलत आया है। गोल्ड लोन सिक्युरिटाइजेशन में पिछले साल के मुकाबले 1.5 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, व्हीकल लोन सेक्टर में भी दमदार रिकवरी दिखी है, जिसने दूसरी तिमाही में कुल वॉल्यूम का 1/3 हिस्सा अकेले कवर किया।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

हालांकि यह ग्रोथ क्रेडिट की स्वस्थ मांग को दिखाती है, लेकिन इसमें एक रिस्क भी है। देश में कुल सिक्युरिटाइजेशन का करीब 95% हिस्सा NBFCs की ओर से आता है। अगर बाजार में लिक्विडिटी टाइट होती है या इंटरेस्ट रेट्स में अस्थिरता आती है, तो NBFCs के लिए फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। निवेशकों को नजर रखनी होगी कि कंपनियां अपनी फंडिंग कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं, क्योंकि लागत बढ़ने से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

आगे का रास्ता

ICRA ने इस सेक्टर को लेकर पॉजिटिव रुख बरकरार रखा है। एजेंसी का अनुमान है कि पूरे फाइनेंशियल ईयर में कुल वॉल्यूम ₹2.6 लाख करोड़ से ₹2.7 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। अब निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि क्या ब्याज दरों में बदलाव के बावजूद यह मोमेंटम आगे भी बना रहता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.