FY27 की पहली तिमाही में भारतीय सिक्युरिटाइजेशन मार्केट ने अब तक का सबसे बड़ा मुकाम हासिल किया है। कुल **₹60,000 करोड़** के इश्यू के साथ, मार्केट में पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में **22%** की जोरदार ग्रोथ देखी गई है। इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी की अगुवाई नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) ने की है, जिन्होंने वॉल्यूम का **98%** से अधिक योगदान दिया।
गोल्ड लोन ने पीछे छोड़े व्हीकल लोन
इस तिमाही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सिक्युरिटाइजेशन पूल में गोल्ड-लोन अब सबसे बड़ा एसेट क्लास बनकर उभरा है, जिसने कुल वॉल्यूम का 31% हिस्सा अपने नाम किया। इससे पहले, व्हीकल लोन इस पोजीशन पर थे, लेकिन इस तिमाही में उनका शेयर घटकर 26% रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि व्हीकल लोन ओरिजिनेटर्स ने मार्केट में कम सक्रियता दिखाई, जबकि गोल्ड लोन फाइनेंसर्स ने फंड जुटाने के लिए डायरेक्ट असाइनमेंट रूट का जमकर इस्तेमाल किया। पब्लिक सेक्टर बैंक इन गोल्ड लोन पूल्स के बड़े खरीदार रहे हैं, जिसका मुख्य कारण इन्हें कम जोखिम वाली संपत्ति मानना है, जिनमें नुकसान का इतिहास बहुत कम रहा है।
निवेशकों की पसंद और फंडिंग के रास्ते
इन ट्रांजैक्शन्स की स्ट्रक्चरिंग में भी बदलाव आया है। डायरेक्ट असाइनमेंट रूट, जिसमें लोन पोर्टफोलियो सीधे इन्वेस्टर को ट्रांसफर किया जाता है, कुल डील्स का 54% हो गया। यह खासकर गोल्ड लोन और सिक्योर्ड बिजनेस लोन के लिए पसंद किया गया। वहीं, पास-थ्रू सर्टिफिकेट्स, जो लोन को ट्रेडेबल सिक्योरिटीज में बंडल करने का एक पारंपरिक तरीका है, उनका शेयर पिछले साल की समान अवधि के 58% से घटकर 46% रह गया। बैंक इन पूल्स में सबसे बड़े इन्वेस्टर बने हुए हैं, जो कुल इश्यू का लगभग 90% खरीदते हैं। हालांकि, म्यूचुअल फंड्स, इंश्योरेंस कंपनियों और फैमिली ऑफिसेस की भागीदारी भी स्थिर बनी हुई है।
आगे की राह
बिजनेस लोन सिक्युरिटाइजेशन में 300 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह मार्केट का 10% हिस्सा बन गया है। यह दर्शाता है कि निवेशक अब उन लोन को अधिक पसंद कर रहे हैं जिनमें कुछ कोलैटरल (संपार्श्विक) जुड़ा हो। इसी तरह, माइक्रोफाइनेंस लोन का शेयर भी बढ़कर 14% हो गया। देश में क्रेडिट की मांग, बैंकों द्वारा कलेक्ट किए जा रहे डिपॉजिट्स की तुलना में तेजी से बढ़ रही है, जिससे मार्केट को फायदा हो रहा है। इसके चलते, बैंक अपने लेंडिंग टारगेट्स को सपोर्ट करने के लिए सिक्युरिटाइजेशन का सहारा ले रहे हैं। सिक्युरिटीज इश्यू करने वाली यूनिक कंपनियों की संख्या पिछले साल के 90 से बढ़कर 115 हो गई है, जिससे आने वाली तिमाहियों में मार्केट की एक्टिविटी मजबूत रहने की उम्मीद है। निवेशकों को इस क्रेडिट ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी पर नजर रखनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि क्या गोल्ड और बिजनेस लोन जैसे कोलैटरल-बेक्ड एसेट्स को प्राथमिकता देने का यह ट्रेंड भविष्य की रिपोर्ट में जारी रहता है।
