F&O सेगमेंट में STT Hike: निवेशकों की सुरक्षा पहले!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने FY27 बजट में ऐलान किया है कि फ्यूचर और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मार्केट में बढ़ती सट्टेबाजी पर लगाम लगाने और खुदरा निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए उठाया गया है। यह माना जा रहा है कि F&O सेगमेंट में 90% से अधिक खुदरा निवेशक भारी घाटे में चल रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में इन निवेशकों को कुल ₹1,05,603 करोड़ का शुद्ध नुकसान हुआ। इसके अलावा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में रिटेल निवेशकों की संख्या भी घटती दिख रही है, जो FY25 में 1.06 करोड़ से कम होकर 30 दिसंबर 2025 तक लगभग 75.43 लाख रह गई है।
प्रस्तावित STT बढ़ोतरी के तहत, फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर यह टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% किया जाएगा। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर STT 0.1% से बढ़कर 0.15% और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर 0.125% होगा।
लिक्विडिटी पर असर और रेगुलेटरी एक्शन
हालांकि, जानकारों का मानना है कि STT में इस बढ़ोतरी से बाजार की लिक्विडिटी (Liquidity) पर असर पड़ सकता है और ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य F&O सेगमेंट में हो रही 'सट्टेबाजी' या जुए जैसी ट्रेडिंग पर अंकुश लगाना है। इससे पहले भी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेरिवेटिव्स मार्केट को स्थिर करने और अत्यधिक ट्रेडिंग को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए हैं, जैसे कि साप्ताहिक डेरिवेटिव्स को युक्तिसंगत बनाना, कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना और मार्जिन की आवश्यकताएं बढ़ाना। यह STT Hike भी उसी दिशा में एक कदम है, जिसका लक्ष्य रिटेल निवेशकों को अधिक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर प्रेरित करना है।
अमेरिकी टैरिफ में कटौती: भारतीय एक्सपोर्ट को बड़ी राहत
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर एक बड़ी खबर है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% तक के टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। यह कदम भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है, खासकर उन सेक्टरों के लिए जो पहले उच्च अमेरिकी शुल्कों से जूझ रहे थे। स्टील, एल्युमीनियम, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और कुछ कृषि उत्पादों को इस टैरिफ कटौती से काफी फायदा होने की उम्मीद है। यह कदम एक व्यापक व्यापार समझौते का हिस्सा है, जिसमें भारत भी व्यापार बाधाओं को कम करने और ऊर्जा खरीद में विविधता लाने पर सहमत हुआ है।
एनालिस्ट्स का नज़रिया
विश्लेषकों ने खुदरा निवेशकों को बचाने के सरकार के इरादे को सराहा है। लेकिन, वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि बढ़ी हुई टैक्स दरें लिक्विडिटी को कम कर सकती हैं और कुछ छोटे ब्रोकर्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कुछ का मानना है कि नई STT दरें बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए ज्यादा दिक्कतें पैदा नहीं करेंगी, लेकिन यह हाई-फ्रीक्वेंसी रिटेल ट्रेडर्स के लिए एक निरुत्साहक (Disincentive) के तौर पर काम कर सकती है। इस STT Hike का बाजार की गहराई और कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असली असर अगले फाइनेंशियल ईयर में ही पता चलेगा।