भारत के रिटेल क्रेडिट मार्केट में बड़ा बदलाव आया है। अब युवा और ग्रामीण भारत कर्ज लेने वाले मुख्य ग्राहक बन गए हैं, जिससे NBFC का लोन पोर्टफोलियो जुलाई 2026 तक **21.4%** बढ़ गया है, लेकिन छोटे लोन में बढ़ते डिफॉल्ट ने चिंता भी बढ़ा दी है।
भारत के रिटेल क्रेडिट सेक्टर में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिल रहा है। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के 'एस्पिरेशनल' ग्राहक अब बाजार की मुख्य ताकत बन गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च तिमाही में कुल 14 करोड़ रिटेल लोन ओरिजिनेशन में से 79% हिस्सा इन्हीं नए ग्राहकों का था, जिसकी वैल्यू ₹19 लाख करोड़ रही।
जुलाई 2026 तक, NBFC के रिटेल लोन में 21.4% की साल-दर-साल ग्रोथ दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 13.7% के मुकाबले काफी ज्यादा है। बैंक और फाइनेंस कंपनियां अब घर या गाड़ी जैसे एसेट के बजाय युवाओं की जीवनशैली और मोबिलिटी जरूरतों के लिए लोन देने पर जोर दे रही हैं।
छोटे लोन में बढ़ता खतरा
तेजी के साथ ही जोखिम भी बढ़ा है। खासकर ₹50,000 से कम के पर्सनल लोन सेगमेंट में डिफॉल्ट रेट 6.4% के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। फिनटेक कंपनियां तेजी से लोन बांटने के चक्कर में क्वालिटी से समझौता कर रही हैं। कई ग्राहक एक साथ कई अकाउंट चला रहे हैं, जिससे उनके ओवर-लीवरेज्ड होने का खतरा बना हुआ है। अगर आय में उतार-चढ़ाव आता है, तो लेंडर्स के एसेट क्वालिटी पर गहरा असर पड़ सकता है।
डिजिटल अंडरराइटिंग का दौर
अब पुराने सैलरी स्लिप वाले तरीके पीछे छूट रहे हैं। बैंक अब UPI ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क और GST डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि बिना क्रेडिट हिस्ट्री वाले ग्राहकों की साख का सही अंदाजा लगाया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को केवल ग्रोथ पर नहीं, बल्कि कर्ज की क्वालिटी पर नजर रखनी होगी। बैंकों और NBFC के GNPA (Gross Non-Performing Asset) रेशियो और अनसिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो की बारीकी से जांच करना जरूरी है। साथ ही, Reserve Bank of India (RBI) के नए दिशा-निर्देश भी इस सेक्टर की चाल तय करेंगे।
