India Retail Credit: ₹162 लाख करोड़ के पार पहुंचा बाज़ार, गोल्ड लोन में 103% की तूफानी तेज़ी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Retail Credit: ₹162 लाख करोड़ के पार पहुंचा बाज़ार, गोल्ड लोन में 103% की तूफानी तेज़ी!
Overview

भारत का रिटेल क्रेडिट बाज़ार शुरुआती 2026 तक **16%** बढ़कर **₹162 लाख करोड़** हो गया है। इस बम्पर ग्रोथ की मुख्य वजह गोल्ड लोन में आई **103%** की ज़बरदस्त तेज़ी है। हालाँकि हाउसिंग फाइनेंस अभी भी सबसे बड़ा सेगमेंट है, लेकिन सुरक्षित उधार की ओर यह बदलाव और NBFCs की तेज़ ग्रोथ, पारंपरिक अनसिक्योर्ड बिज़नेस क्रेडिट से एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं।

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सुरक्षित कर्ज़ की ओर बड़ा बदलाव

भारत के रिटेल क्रेडिट बाज़ार का ₹162 लाख करोड़ तक पहुंचना, उधारकर्ताओं के व्यवहार में एक बड़े बदलाव को दिखाता है। जहाँ कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) में सालाना 16% की बढ़ोतरी हुई, वहीं आंकड़े साफ तौर पर कोलेटरलाइज्ड लेंडिंग (Collateralized Lending) यानी गिरवी रखकर कर्ज़ लेने की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। गोल्ड लोन ओरिजिनेशन (Gold Loan Origination) में 103% की भारी उछाल इस ट्रेंड का सबसे बड़ा संकेत है। इससे पता चलता है कि ग्राहक अब अनसिक्योर्ड पर्सनल क्रेडिट लाइनों पर निर्भर रहने के बजाय, अपनी लिक्विडिटी (Liquidity) की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपनी कीमती संपत्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोने की बढ़ती कीमतों ने इस बदलाव को और तेज़ किया है, जिससे लेंडर्स (Lenders) को लोन-टू-वैल्यू रेश्यो (Loan-to-Value Ratio) बढ़ाने और उधारकर्ताओं को अपने बेकार पड़े सोने को भुनाने का प्रोत्साहन मिला है।

NBFCs का दबदबा और बाज़ार की पकड़

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) ने इस मोमेंटम को भुनाने में कामयाबी हासिल की है, जिन्होंने नए लोन ओरिजिनेशन में 97% की बढ़ोतरी दर्ज की है। खासकर उनके गोल्ड लोन पोर्टफोलियो (Gold Loan Portfolio) में 213% का भारी उछाल यह बताता है कि ये कंपनियाँ पारंपरिक बैंकों से मार्केट शेयर छीनने में सफल हो रही हैं। जहाँ पब्लिक सेक्टर बैंक हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में 44% शेयर के साथ मज़बूत पकड़ बनाए हुए हैं, वहीं NBFCs के फुर्तीले लेंडिंग मॉडल हाई-फ्रीक्वेंसी, सिक्योर लेंडिंग स्पेस में ज़्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं। इस अंतर का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बिज़नेस लोन ओरिजिनेशन में महज़ 3% की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो दर्शाता है कि छोटे उद्यम पारंपरिक बिज़नेस लेंडिंग की जटिलताओं से बचकर पर्सनल गोल्ड-बैक्ड क्रेडिट का विकल्प चुन रहे हैं।

छिपे हुए खतरे: स्ट्रक्चरल कमजोरियां

एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार की कहानी, खास तौर पर हाउसिंग और माइक्रोफाइनेंस से जुडी डिफ़ॉल्ट दरों (Delinquencies) में कमी, लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल रिस्क (Structural Risk) को छिपा रही है। गोल्ड पर प्राथमिक कोलेटरल (Collateral) के तौर पर निर्भरता, बुलियन मार्केट (Bullion Market) की कीमतों में अस्थिरता के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता पैदा करती है। अगर सोने की कीमतों में लगातार गिरावट आती है, तो तेज़ी से बढ़ते इन लोन बुक्स (Loan Books) को कवर करने वाले कोलेटरल का मूल्य खत्म हो सकता है, जिससे एसेट्स में अचानक कमी आ सकती है। इसके अलावा, NBFCs का हाई-ग्रोथ, सिक्योर प्रोडक्ट्स में आक्रामक विस्तार अक्सर प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स (Underwriting Standards) को कम करने से जुड़ा होता है। अगर मौजूदा कंज्यूमर लिक्विडिटी क्रंच (Consumer Liquidity Crunch) बढ़ता है, तो इन सिक्योर पोर्टफोलियोज़ के बनने की तेज़ी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Non-Performing Assets) में तेज़ी से बदल सकती है, जो फिलहाल बढ़ती कीमतों के माहौल में छिपी हुई है।

भविष्य की राह

बाज़ार के जानकारों को उम्मीद है कि 2026 के दूसरे हाफ तक सिक्योर लेंडिंग की यह प्रवृत्ति जारी रहेगी। माइक्रोफाइनेंस डिफ़ॉल्ट दरों का 2.3% पर स्थिर होना क्रेडिट कॉन्फिडेंस (Credit Confidence) के लिए एक अस्थायी आधार प्रदान करता है, लेकिन बिज़नेस से जुड़े क्रेडिट में नरमी यह बताती है कि व्यापक आर्थिक भागीदारी घरेलू स्तर के कर्ज पर ज़्यादा निर्भर हो रही है। विश्लेषक प्रमुख NBFCs के लोन-टू-वैल्यू रेश्यो पर बारीकी से नज़र रखेंगे, क्योंकि कोलेटरलाइज्ड लेंडिंग पर किसी भी नियामक सख्ती से उनकी ग्रोथ की रफ्तार में तुरंत कमी आ सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.