India Ratings and Research ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए बैंक क्रेडिट ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर **15%** कर दिया है। कॉरपोरेट सेक्टर की ओर से बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है, लेकिन नए अकाउंटिंग नियमों के चलते बैंकों के मुनाफे पर दबाव की आशंका भी जताई गई है।
ग्रोथ का इंजन और चुनौतियां
India Ratings ने अपने पुराने अनुमान 13% को बढ़ाकर अब 15% कर दिया है। यह तेजी मुख्य रूप से कंपनियों की वर्किंग कैपिटल और नए प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मांग के कारण है। हालांकि, यह चमक-धमक कुछ वित्तीय चुनौतियों के साथ आ रही है।
प्रोविजनिंग नियमों का असर
बैंकों को अब 'एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस' (ECL) फ्रेमवर्क के तहत अधिक फंड रिजर्व में रखना होगा। इससे क्रेडिट कॉस्ट, जो पिछले साल 0.65% थी, वह FY27 में बढ़कर 0.74% होने का अनुमान है। नतीजा यह होगा कि बैंकों का रिटर्न ऑन एसेट्स 0.06% घटकर 1.31% पर आ सकता है।
पब्लिक सेक्टर बनाम प्राइवेट बैंक
प्राइवेट बैंकों के मुकाबले पब्लिक सेक्टर बैंकों को ज्यादा झटका लग सकता है। प्राइवेट बैंक पहले से ही बेहतर प्रोविजनिंग बफर के साथ काम कर रहे हैं, जबकि सरकारी बैंकों के बैलेंस शीट पर यह बदलाव एक बड़ा बोझ बन सकता है।
डिपॉजिट की जंग
बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोन के मुकाबले डिपॉजिट जुटाने की है। लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) पहली तिमाही में 84.8% तक पहुंच गया है, जो बताता है कि लोन बांटने की रफ्तार डिपॉजिट आने से ज्यादा तेज है। वहीं, NBFCs फिलहाल जोखिम कम करने पर ध्यान दे रहे हैं ताकि एसेट क्वालिटी सुरक्षित रहे।
इन्वेस्टर्स के लिए अब यह देखना सबसे जरूरी होगा कि बैंक लोन ग्रोथ और डिपॉजिट जुटाने के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।
