साल 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में मर्जर और एक्वीजीशन (M&A) की डील वैल्यू में जबरदस्त उछाल आया है। ये वैल्यू **127%** बढ़कर **$36.3 अरब** पर पहुंच गई, भले ही कुल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में **18%** की गिरावट आई हो। इस तेजी की मुख्य वजह बड़ी ग्लोबल एक्वीजीशन रही, जिसमें फार्मा सेक्टर सबसे आगे था।
बड़े सौदों से चमका भारतीय कॉर्पोरेट जगत!
साल 2026 की दूसरी तिमाही में भारतीय कंपनियों के सौदेबाजी में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। जहां सौदों की संख्या तो घटी, वहीं उनकी वैल्यू आसमान छू गई। मर्जर, एक्वीजीशन (M&A) और प्राइवेट इक्विटी (PE) को मिलाकर कुल डील वैल्यू 127% की छलांग लगाकर $36.3 अरब तक पहुंच गई। यह उछाल तब आया जब कुल डील्स की संख्या 18% कम हुई। इससे साफ है कि कंपनियां अब छोटे-मोटे सौदों के बजाय बड़ी, रणनीतिक और महंगी ग्लोबल एक्सपेंशन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
M&A का जलवा, ग्लोबल एक्वीजीशन का दबदबा
इस तिमाही में M&A यानी मर्जर और एक्वीजीशन ही सबसे बड़ी वजह बनकर उभरे। M&A डील्स का कुल वैल्यू 240 ट्रांजेक्शन में $27.9 अरब रहा। ये वैल्यू साल 2022 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे ज्यादा है। इस बड़ी बढ़ोतरी में पांच बड़ी ग्लोबल एक्वीजीशन का हाथ रहा, जिन्होंने कुल M&A वैल्यू का 84% हिस्सा साधा।
इस ट्रेंड में सबसे आगे रही Sun Pharmaceutical Industries, जिसने Organon & Co को $11.75 अरब में खरीदा। यह भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए एक बड़ी छलांग है। इसके अलावा, Bharti Airtel ने Airtel Africa में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए $2.97 अरब का निवेश किया। EPL Ltd, VINCI Highways और GMR Group के सौदे भी काफी अहम रहे।
प्राइवेट इक्विटी में नरमी, पर डील का साइज़ बढ़ा
वहीं, M&A की बहार के बीच प्राइवेट इक्विटी (PE) निवेश में थोड़ी नरमी दिखी। PE डील्स की वैल्यू 8% घटकर $8.4 अरब रह गई, जो 325 डील्स में हुई। हालांकि, एक राहत की बात यह रही कि औसत डील का साइज़ बढ़कर $25.8 मिलियन हो गया, जो पिछली तिमाही में $21.8 मिलियन था। इससे संकेत मिलता है कि PE निवेशक भी अब कम लेकिन बड़ी डील्स में पैसा लगा रहे हैं। इसी तिमाही में Skyroot Aerospace और KreditBee जैसी चार नई यूनिकॉर्न कंपनियों का भी उदय हुआ, जो हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स में लगातार दिलचस्पी दिखाती है।
सेक्टर पर एक नज़र
वैल्यू के लिहाज़ से फार्मा, हेल्थकेयर और बायोटेक इंडस्ट्री सबसे आगे रहीं, जिन्होंने $13.7 अरब का निवेश आकर्षित किया। वहीं, डील्स की संख्या के मामले में रिटेल और कंज्यूमर बिजनेस सबसे आगे रहे, जहां 95 डील्स हुईं। इसके अलावा, IT और IT-इनेबल्ड सर्विसेज, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज, और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे सेक्टर भी सक्रिय रहे।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि अब कंपनियां इंटरनेशनल ग्रोथ के लिए बड़े पैमाने पर पैसा लगा रही हैं। आगे चलकर, इन बड़ी ग्लोबल एक्वीजीशन का फाइनेंशियल असर देखना अहम होगा। निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि ये कंपनियां इतने बड़े सौदों से जुड़े कर्ज या कैश फ्लो की जरूरतों को कैसे पूरा करती हैं, और क्या वे अपने मौजूदा बिजनेस में इन विदेशी ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करके भविष्य में मुनाफा बढ़ा पाती हैं।
