AI in Indian Banking: वित्तीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा फैसला, AI के लिए अनिवार्य होंगे सैंडबॉक्स

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI in Indian Banking: वित्तीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा फैसला, AI के लिए अनिवार्य होंगे सैंडबॉक्स

Department of Financial Services ने सभी बैंकों को आदेश दिया है कि वे AI टूल्स को बाजार में उतारने से पहले कंट्रोल्ड सैंडबॉक्स में टेस्ट करें। इस पहल का मकसद विदेशी मॉडलों पर निर्भरता कम करना और साइबर खतरों को रोकना है।

भारतीय वित्तीय तंत्र को सुरक्षित बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 31 अगस्त, 2026 को Department of Financial Services ने वित्तीय संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी AI टूल को पब्लिक करने से पहले उन्हें रेगुलेटरी सैंडबॉक्स में टेस्ट करना अनिवार्य होगा। एडिशनल सेक्रेटरी देबाशीष पृस्टी ने साफ किया है कि यह कदम तकनीक के साथ फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए जरूरी है।

क्यों है इंडिजिनस AI की जरूरत?

वर्तमान में भारतीय बैंक विदेशी AI तकनीकों पर निर्भर हैं, जो न केवल महंगी हैं बल्कि भारतीय मार्केट की परिस्थितियों के हिसाब से नहीं बनी हैं। सरकार अब UPI और Aadhaar जैसे हमारे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम करने वाले स्थानीय AI मॉडल तैयार करने पर जोर दे रही है।

'ब्लैक-बॉक्स' से डर और चुनौतियां

Reserve Bank of India (RBI) ने 'इंटेलिजेंट फाइनेंस' से होने वाले सिस्टमैटिक रिस्क पर चिंता जताई है। सबसे बड़ा डर 'Algorithmic Bias' का है, जहाँ AI बिना किसी ठोस कारण के लोन या क्रेडिट रिजेक्ट कर सकता है। सैंडबॉक्स के जरिए रेगुलेटर इन सिस्टम्स को ऑडिट कर पाएंगे ताकि इकॉनमी पर बुरा असर न पड़े।

सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर

सरकार FREE-AI फ्रेमवर्क लागू कर रही है, जो बोर्ड स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही तय करेगा। साथ ही, SEBI ने डिजिटल व्यवधानों से निपटने के लिए IT Resilience Index पेश किया है। अब बैंकों को 'वेंडर कंसंट्रेशन' के रिस्क से बचने के लिए सख्त कंटीजेंसी प्लान भी तैयार रखने होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.