साल 2026 की पहली छमाही (H1) में भारत का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट तेजी से आगे बढ़ा है। इस दौरान **100** से ज्यादा डील्स के जरिए **$3.5 बिलियन** की फंडिंग की गई, जिसमें हेल्थकेयर सेक्टर का बड़ा योगदान रहा है।
बाजार की नई चाल: घरेलू फंड्स का बोलबाला
भारत के प्राइवेट क्रेडिट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब यह बाजार ग्लोबल साइकिल्स पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू लिक्विडिटी पर ज्यादा आधारित है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल डील वैल्यू में घरेलू फंड्स की हिस्सेदारी 74% है, जबकि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में यह 79% तक पहुंच गई है।
हेल्थकेयर सेक्टर पर भरोसा
रियल एस्टेट अभी भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है, लेकिन हेल्थकेयर सेक्टर ने इस बार 13% मार्केट शेयर के साथ अपनी मजबूती दर्ज की है। निवेशकों का मानना है कि हेल्थकेयर का बिजनेस मॉडल स्थिर कैश फ्लो जेनरेट करता है और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी पूंजी को सुरक्षा प्रदान करता है।
मिड-मार्केट पर फोकस
मार्केट का रुझान अब बड़े डील साइज के बजाय मिड-मार्केट सेगमेंट की ओर शिफ्ट हो गया है। $10 मिलियन से $60 मिलियन के बीच वाली डील्स ने कुल एक्टिविटी में 61% की हिस्सेदारी दिखाई है। इसके विपरीत, $120 मिलियन से अधिक के बड़े डील्स का हिस्सा पिछले 27% से घटकर अब 18% पर आ गया है।
भविष्य में इस मार्केट की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि फंड्स कितनी कुशलता से मिड-साइज अवसरों को भुनाते हैं और बदलते रेगुलेटरी नियमों के साथ तालमेल कैसे बिठाते हैं।
