India Post ने अपने ग्राहकों के लिए 1 सितंबर से एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत, Post Office Savings Bank (POSB) खातों को मोबाइल नंबर से लिंक करना अनिवार्य होगा, वरना DREAM ऐप से लेन-देन (Transaction) नहीं हो पाएगा। यह कदम ग्रामीण बैंकिंग में Aadhaar-आधारित e-KYC को बढ़ावा देगा, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी और किसी भी ब्रांच से काम करने की सुविधा मिलेगी।
क्या हुआ है?
इंडिया पोस्ट (Department of Posts) ने अपने ग्रामीण बैंकिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब 1 सितंबर से, जिन ग्राहकों ने अपने पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक (POSB) खातों को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लिंक नहीं कराया है, वे DREAM मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं कर पाएंगे। यह बदलाव डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों में वित्तीय वेरिफिकेशन को आसान बनाने की कोशिश का हिस्सा है, जहां पोस्ट ऑफिस अक्सर बैंकिंग का मुख्य जरिया होते हैं।
मोबाइल नंबर की अनिवार्यता
नए नियम के मुताबिक, मोबाइल नंबर लिंक न कराने वाले खातों के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन पर रोक लगा दी जाएगी। 1 सितंबर की डेडलाइन के बाद, DREAM ऐप के ज़रिए Aadhaar-वेरिफाइड डिपॉजिट और विड्रॉल जैसे काम नहीं हो पाएंगे। ग्राहकों को ऐप-आधारित बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अपनी कॉन्टैक्ट इन्फॉर्मेशन अपडेट करानी होगी, जो कि ट्रांजेक्शन अलर्ट और फ्रॉड रोकने के लिए ज़रूरी है।
नई सुविधा: ब्रांच इंटरऑपरेबिलिटी
ग्रामीण बैंकिंग के लिए एक अहम बदलाव के तौर पर, इंडिया पोस्ट 'BO inter-operability' की शुरुआत कर रहा है। पहले ग्राहक सिर्फ उसी पोस्ट ऑफिस ब्रांच में ट्रांजेक्शन कर पाते थे, जहां उनका खाता खुला था। लेकिन अब नए सिस्टम के तहत, योग्य ग्राहक अपने Aadhaar-वेरिफाइड प्रोफाइल का इस्तेमाल करके नेटवर्क की किसी भी ब्रांच पोस्ट ऑफिस में बैंकिंग सेवाएं ले सकते हैं। यह प्रवासी मजदूरों और सरकारी स्कीम के लाभार्थियों के लिए बड़ी सहूलियत है जो अपने होम ब्रांच से दूर हो सकते हैं।
ट्रांजेक्शन लिमिट और Aadhaar इंटीग्रेशन
नया e-KYC सिस्टम बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पर निर्भर है, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी। अब ग्राहक बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के ज़रिए ₹50,000 तक के सेविंग्स, रिकरिंग डिपॉजिट (RD), और सुकन्या समृद्धि अकाउंट में डिपॉजिट कर सकते हैं। इसके अलावा, ₹20,000 तक का विड्रॉल बिना विड्रॉल स्लिप के संभव होगा।
हालांकि, इस नए सिस्टम की कुछ सीमाएं हैं। फिलहाल, ये डिजिटल सुविधाएं सिर्फ सिंगल-होल्डर खातों के लिए उपलब्ध हैं, यानी जॉइंट और माइनर खातों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। साथ ही, यह सिस्टम सीधे UIDAI डेटाबेस से ग्राहक की जानकारी लेगा। पोस्टल स्टाफ नाम या जन्मतिथि जैसी जानकारी को मैन्युअल रूप से एडिट नहीं कर पाएगा। अगर Aadhaar सिस्टम से मिली जानकारी खाते के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है, तो e-KYC कन्वर्शन रुक जाएगा जब तक रिकॉर्ड ठीक नहीं हो जाते, ऐसे में उन ग्राहकों को पारंपरिक तरीकों का ही इस्तेमाल करना पड़ेगा।
निवेशकों और ग्राहकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
1 सितंबर की डेडलाइन नज़दीक आते ही, इस नए सिस्टम को अपनाने की रफ़्तार और तकनीकी ट्रांज़िशन की प्रभावशीलता पर नज़र रखनी होगी। ग्राहकों को सलाह है कि वे सेवा में किसी भी रुकावट से बचने के लिए अपना Aadhaar डेटा और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट रखें। ऑपरेशनल तौर पर, इस कदम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभाग डेटा मिसमैच को कितनी कुशलता से संभालता है और क्या भविष्य में यह सिस्टम जॉइंट और माइनर खातों को भी शामिल कर पाता है।
