NPS Swasthya: अब रिटायरमेंट फंड से होंगे मेडिकल खर्चे, लेकिन ये है बड़ा रिस्क!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NPS Swasthya: अब रिटायरमेंट फंड से होंगे मेडिकल खर्चे, लेकिन ये है बड़ा रिस्क!
Overview

भारत में PFRDA ने NPS Swasthya नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के सदस्य अब मेडिकल खर्चों के लिए अपने रिटायरमेंट सेविंग्स का इस्तेमाल कर सकेंगे. इस प्लान में आप अपने पर्सनल कॉन्ट्रिब्यूशन का 25% तक निकाल सकते हैं, पर इसमें मेडिकल जोखिम सीधे आप पर आ जाता है और रिटायरमेंट के लिए जमा पैसा कम हो सकता है.

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अब पेंशन फंड से होंगे मेडिकल खर्चे

PFRDA, यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी, एक नई पहल NPS Swasthya लेकर आई है. यह नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का ही एक हिस्सा है, जिसका मकसद देश की बूढ़ी होती आबादी को उनके मेडिकल खर्चों से निपटने में मदद करना है. यह पायलट प्रोजेक्ट उन ज़रूरतों को पूरा करेगा जिनके लिए शायद रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस काफी न हो, जैसे डॉक्टर की फीस, दवाइयां और अन्य छोटी-मोटी मेडिकल ज़रूरतें. फिलहाल यह एक रेगुलेटरी सैंडबॉक्स में है, और इसका लक्ष्य पेंशन फंड को दोहरी भूमिका देना है - रिटायरमेंट के लिए बचत और मेडिकल ज़रूरतों के लिए एक सुलभ फंड.

मेडिकल के लिए फंड कैसे निकालें?

NPS Swasthya, रेगुलर NPS अकाउंट से थोड़ा अलग है. यह 'नेट एलिजिबल बैलेंस' (Net Eligible Balance) सिस्टम पर काम करता है. इसके तहत, सब्सक्राइबर अपनी व्यक्तिगत कॉन्ट्रिब्यूशन (Personal Contribution) का 25% तक निकाल सकते हैं. सबसे खास बात यह है कि इसमें बार-बार पैसे निकालने की लिमिट और इंतज़ार की अवधि को हटा दिया गया है, बशर्ते अकाउंट में कम से कम ₹50,000 की मिनिमम राशि बनी रहे. इस सिस्टम को थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स (TPAs) और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स से जोड़कर पेमेंट प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है, ताकि इंश्योरेंस क्लेम के इंतज़ार से जल्दी राहत मिल सके.

रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए खतरे

यह नया तरीका लंबी अवधि की फाइनेंशियल प्लानिंग पर असर डाल सकता है. आम मेडिकल खर्चों के लिए रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल करने से 'लिक्विडिटी ट्रैप' (liquidity trap) की स्थिति बन सकती है. ऐसे में, बार-बार पैसे निकालने से रिटायरमेंट कॉर्पस (retirement corpus) की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ेगा. हालांकि, अगर इनपेशेंट ट्रीटमेंट (inpatient treatment) का खर्च फंड के 70% से ज़्यादा हो, तो पूरी राशि निकालने की सुविधा है, लेकिन असली मसला यह है कि अब मेडिकल इन्फ्लेशन (medical inflation) का जोखिम सीधे तौर पर इंडिविजुअल्स पर आ गया है, जो आमतौर पर इंश्योरेंस कंपनियां उठाती हैं.

इससे भी बड़ी चिंता यह है कि चूंकि ये फंड्स मार्केट में इन्वेस्टेड होते हैं, ऐसे में ज़रूरी मेडिकल ज़रूरतें पड़ने पर सब्सक्राइबर को मार्केट में गिरावट के दौरान सस्ते दामों पर अपने एसेट्स बेचने पड़ सकते हैं, जो उनकी लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. कम आय वाले लोगों के लिए, बढ़ते हेल्थकेयर खर्चों को मैनेज करने के लिए यह मजबूरी बन सकती है, जिनके 2026 तक 11.5% से 14% तक बढ़ने का अनुमान है. इस स्कीम पर एक मुख्य फाइनेंशियल शील्ड के तौर पर निर्भर रहना, बजाय इसके कि इसे एक अतिरिक्त सपोर्ट मानें, बिना भारी-भरकम सेविंग्स के जोखिम भरा हो सकता है.

आगे क्या?

PFRDA, Axis Pension Fund और Aditya Birla Health Insurance जैसी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि ट्रांसपेरेंसी बढ़ाई जा सके और हेल्थ-पेंशन सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके. NPS Swasthya की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके इन्वेस्टमेंट्स कैसा परफॉर्म करते हैं और क्या डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे MAven App और CAMS CRA इंटीग्रेशन, क्लेम को कुशलता से प्रोसेस कर पाता है. यह देखना बाकी है कि यह प्रोग्राम आम पर्सनल फाइनेंस टूल के रूप में सफल होता है या सिर्फ उन लोगों के लिए एक स्पेशल ऑप्शन बनकर रह जाता है जिनके पास काफी ज़्यादा सेविंग्स हैं.

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.