PSU Bonds: सरकारी कंपनियों का जलवा! SIDBI, NaBFID, HUDCO ने जुटाए ₹12,000 Cr, निवेशकों ने दिखाया भरोसा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
PSU Bonds: सरकारी कंपनियों का जलवा! SIDBI, NaBFID, HUDCO ने जुटाए ₹12,000 Cr, निवेशकों ने दिखाया भरोसा
Overview

Small Industries Development Bank of India (SIDBI), National Bank for Financing Infrastructure and Development (NaBFID), और Housing and Urban Development Corporation (HUDCO) ने इस हफ्ते डेट कैपिटल मार्केट से करीब **₹12,000 करोड़** सफलतापूर्वक जुटाए हैं। इन पब्लिक सेक्टर की कंपनियों ने प्रतिस्पर्धी दरों पर फंड हासिल किया है, जो बाजार में स्वस्थ निवेशक मांग को दर्शाता है।

बड़े PSU बॉन्ड इश्यू में दिखी दमदार मांग

सरकारी क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं की ओर से डेट इश्यू में आई एक सापेक्षिक खामोशी के बाद, SIDBI, NaBFID और HUDCO ने मिलकर लगभग ₹12,000 करोड़ की राशि जुटाई है। यह सफल फंड जुटाना अच्छी गुणवत्ता वाले उधारकर्ताओं के लिए निवेशक की मजबूत भूख का संकेत देता है। ये इश्यू प्रतिस्पर्धी दरों पर किए गए थे, जो प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स की मांग को रेखांकित करता है। इस गतिविधि से विकास वित्तपोषण (development financing) और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (infrastructure projects) के लिए महत्वपूर्ण लिक्विडिटी (liquidity) मिलेगी।

फंड जुटाने की डिटेल्स और मार्केट का मिजाज

SIDBI ने तीन साल के बॉन्ड पर 7.22% कूपन रेट पर ₹7,866 करोड़ जुटाए। इसके बाद NaBFID ने 7.45% कूपन वाले 10-साल के बॉन्ड के जरिए ₹2,553.50 करोड़ हासिल किए। HUDCO ने 7.87% यील्ड (yield) वाले पर्पेचुअल बॉन्ड (perpetual bonds) से ₹1,442 करोड़ जोड़े। कुल मिलाकर, ₹13,500 करोड़ की नोटिफाइड राशि के मुकाबले ₹11,861.50 करोड़ स्वीकार किए गए, जो संस्थागत निवेशकों (institutional investors) की ओर से चुनिंदा लेकिन सकारात्मक मांग को दर्शाता है।

FY26 में फंड जुटाने का धीमा ट्रेंड

यह सफल फंड जुटाना, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (FY26) के दौरान भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में समग्र फंड जुटाने की धीमी रफ्तार के बीच हुआ है। लगातार भू-राजनीतिक तनावों (geopolitical tensions) से प्रभावित ऊंचे यील्ड्स (yields) ने जारीकर्ताओं (issuers) के उत्साह को कम कर दिया है। FY26 के पहले नौ महीनों में, इस माध्यम से जुटाए गए फंड में पिछले वर्ष की तुलना में 6% की गिरावट आई, जो ₹7.19 ट्रिलियन की तुलना में ₹6.76 ट्रिलियन रहा। कैलेंडर वर्ष 2025 में ₹10.08 ट्रिलियन के इश्यू हुए, जो 2024 के ₹10.09 ट्रिलियन से थोड़े ही कम हैं।

बाजार की चाल पर विश्लेषकों की राय

बाजार के प्रतिभागियों का मानना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले जारीकर्ताओं (issuers) से सप्लाई में ठहराव ने स्वस्थ मांग और आकर्षक प्राइसिंग (pricing) का समर्थन किया। हालांकि, वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि बाजार नए इश्यू की मात्रा के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। यदि सप्लाई निवेशक की अवशोषण क्षमता (absorption capacity) से अधिक हो जाती है, तो यह प्राइसिंग दबाव पैदा कर सकता है और जारीकर्ताओं के लिए कम अनुकूल यील्ड्स का कारण बन सकता है। Rockfort Fincap के संस्थापक Venkatakrishnan Srinivasan ने कहा कि उच्च-गुणवत्ता वाले जारीकर्ता बॉन्ड मार्केट में प्रतिस्पर्धी तरीके से प्रवेश करना जारी रख रहे हैं। उन्होंने बाजार में प्रवेश करने से पहले निवेश की भूख का प्रभावी ढंग से आकलन करने के लिए जारीकर्ताओं, मर्चेंट बैंकरों (merchant bankers) और बड़े संस्थागत निवेशकों के बीच करीबी संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

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