जुलाई 2026 में भारत के प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल (PE/VC) मार्केट में जोरदार तेजी देखी गई है। कुल निवेश **52%** बढ़कर **$4.1 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है, हालांकि एग्जिट (exits) के मोर्चे पर निवेशकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
निवेश की रफ्तार में तेजी
जुलाई 2026 में भारतीय इकोसिस्टम में कुल 111 सौदे हुए। जून में यह आंकड़ा $2.7 बिलियन था, जो अब बढ़कर $4.1 बिलियन हो गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद बड़े निवेशक भारतीय बाजार को लेकर काफी उत्साहित हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर बना 'हॉटकेक'
निवेश की इस तेजी में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दबदबा रहा, जिसने अकेले $1.5 बिलियन जुटाए। प्रमुख सौदों में Brookfield का $600 मिलियन के निवेश के साथ Lumara को लॉन्च करना शामिल है। इसके अलावा, TPG, GIC और ICICI Bank के कंसोर्टियम ने Aseem Infrastructure Finance का $521 मिलियन में अधिग्रहण किया है। अब निवेशक छोटी कंपनियों के बजाय बड़े और मैच्योर एसेट्स पर दांव लगा रहे हैं।
एग्जिट में भारी सुस्ती
जहां निवेश बढ़ रहा है, वहीं निवेशकों के लिए अपना पैसा बाहर निकालने (Exits) के मौके कम हो गए हैं। जुलाई 2026 में एग्जिट की वैल्यू गिरकर $1.6 बिलियन रही, जो पिछले साल जुलाई के $9.2 बिलियन के मुकाबले 83% कम है। सेकेंडरी सेल्स अभी एग्जिट का सबसे आम जरिया बना हुआ है।
लिक्विडिटी का मजबूत आधार
भले ही एग्जिट धीमी हो, लेकिन फंड्स के पास नकदी की कमी नहीं है। साल 2026 में अब तक रिकॉर्ड $23.7 बिलियन की फंडिंग जुटाई जा चुकी है। Bain Capital, NIIF, Tiger Global और ChrysCapital जैसी बड़ी फर्में इस कैपिटल पूल का हिस्सा हैं, जो मार्केट की वोलेटिलिटी के खिलाफ एक कुशन का काम कर रही हैं।
आगे की चुनौतियां
बाजार के जानकारों की नजर अब उन रिस्क पर है जो डील-मेकिंग को प्रभावित कर सकते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में जमीन अधिग्रहण, ग्रिड कनेक्टिविटी और पावर परचेज कॉन्ट्रैक्ट्स में देरी जैसी स्ट्रक्चरल समस्याएं बनी हुई हैं। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल टेंशन भी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकती है।
