भारत में प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) का जलवा बरकरार है। साल 2026 की तीसरी तिमाही में निवेश का आंकड़ा **46%** बढ़कर **$17.1 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है।
भारत के इन्वेस्टमेंट मार्केट में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। निवेशकों ने छोटे पारंपरिक इक्विटी सौदों से हटकर अब अपना पूरा ध्यान बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर लगा दिया है। जहां शुद्ध वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी एक्टिविटी में 2% की गिरावट दर्ज की गई और यह $8.5 बिलियन रही, वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में 182% का तूफानी उछाल आया और यह $8.6 बिलियन के पार पहुंच गया।
बड़े सौदों का दम
मार्केट में कुल सौदों की संख्या में 9% की कमी आई है और कुल 348 ट्रांजेक्शन ही रिकॉर्ड किए गए। हालांकि, कुल वैल्यू बहुत ज्यादा रही, क्योंकि सिर्फ 36 बड़े सौदों ने कुल निवेश का 76% हिस्सा कवर कर लिया। KKR द्वारा Medicover India का $1.4 बिलियन में अधिग्रहण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह बताता है कि निवेशकों की भूख अब चुनिंदा और स्ट्रैटेजिक एसेट्स के लिए बढ़ गई है।
एग्जिट और लिक्विडिटी का संकट
निवेश का आना तो जोरदार रहा, लेकिन निवेशकों के लिए बाहर निकलने (Exit) का रास्ता थोड़ा कठिन हो गया है। कुल डिवेस्टमेंट्स (Divestments) पिछले साल के मुकाबले 24% घटकर $10.4 बिलियन रह गए हैं। ओपन मार्केट सेल के जरिए $5.9 बिलियन का एग्जिट हुआ, लेकिन स्ट्रैटेजिक सेल में सुस्ती दिखी है। बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के कारण निवेशक अब मुनाफावसूली में सावधानी बरत रहे हैं।
इकोनॉमिक प्रेशर और भविष्य की राह
Reserve Bank of India (RBI) की रेपो रेट बढ़ोतरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच अब निवेशक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। फंडरेजिंग की बात करें तो 32 फंड्स के जरिए $6.4 बिलियन जुटाए गए, जिसमें NIIF Infrastructure Fund II का $2 बिलियन का निवेश एक प्रमुख हाईलाइट रहा। आने वाले समय में बाजार उन कंपनियों पर दांव लगाएगा जिनका प्रॉफिट मार्जिन मजबूत है, न कि उन पर जो सिर्फ आक्रामक विस्तार की योजना बना रही हैं।
