Microfinance Sector: कर्ज बाजार में बड़ी छलांग की तैयारी, FY27 तक **15%** ग्रोथ का लक्ष्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
Microfinance Sector: कर्ज बाजार में बड़ी छलांग की तैयारी, FY27 तक **15%** ग्रोथ का लक्ष्य

भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर अब आक्रामक विस्तार के बजाय क्वालिटी पर ध्यान दे रहा है। FY27 तक **15%** पोर्टफोलियो ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन निवेशकों को ग्रामीण मांग और स्थानीय जोखिमों पर नजर रखनी होगी।

भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर अपनी रणनीति में बड़े बदलाव कर रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के अंत तक लोन पोर्टफोलियो में 15% का उछाल देखने को मिल सकता है। अब कंपनियां केवल लोन बांटने के बजाय लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी और एसेट क्वालिटी को प्राथमिकता दे रही हैं।

पोर्टफोलियो का नया गणित

इंडस्ट्री बॉडी MFIN का अनुमान है कि माइक्रोफाइनेंस लोन पोर्टफोलियो FY27 तक करीब ₹3.75 लाख करोड़ के आंकड़े को छू सकता है। इस ग्रोथ को सहारा मिल रहा है बेहतर एसेट क्वालिटी से। नए अंडरराइटिंग नियमों के तहत एक कर्जदार को मिलने वाले लेंडर्स की संख्या सीमित की गई है, जिससे ओवर-लीवरेजिंग (कर्ज का बोझ) पर लगाम लगी है और पोर्टफोलियो-एट-रिस्क (PAR) आंकड़ों में बड़ी कमी आई है।

रिस्क और डायवर्सिफिकेशन

बड़ी कंपनियां अब सिर्फ माइक्रो-लेंडिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। रिस्क को कम करने के लिए गोल्ड लोन और MSME फाइनेंस जैसे सेगमेंट में तेजी से एंट्री की जा रही है। वहीं, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से डिजिटल डिसबर्समेंट और कलेक्शन को आसान बनाया गया है, जिससे ऑपरेशनल घर्षण कम हुआ है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

रेटिंग एजेंसी ICRA ने सेक्टर का आउटलुक 'स्टेबल' रखा है, लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में खराब मॉनसून या मांग में कमी आने से कलेक्शन पर असर पड़ सकता है, जिससे NPA में हल्की बढ़ोतरी की संभावना बनी रहती है। साथ ही, बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटी माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को फंड जुटाने में संघर्ष करना पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में 'कलेक्शन एफिशिएंसी' और 'कॉस्ट ऑफ बॉरोइंग' पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.