साइबर खतरों को देखते हुए सरकार ने पूरे BFSI सेक्टर को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। अब बैंकों को भविष्य के हमलों से निपटने के लिए क्वांटम-रेसिस्टेंट एन्क्रिप्शन और AI सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य रूप से लागू करने होंगे, जिससे IT खर्च में इजाफा हो सकता है।
अब डेटा होगा पूरी तरह सुरक्षित
भारत सरकार ने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर को 'क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर' घोषित कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब पुराने सुरक्षा मानकों से काम नहीं चलेगा। बैंकों को अब ऐसे एन्क्रिप्शन तकनीक की ओर शिफ्ट होना होगा, जिसे भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर भी आसानी से क्रैक न कर सकें।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण है 'Harvest Now, Decrypt Later' (HNDL) रणनीति। हैकर्स आजकल एन्क्रिप्टेड डेटा को चुराकर स्टोर कर रहे हैं, ताकि भविष्य में क्वांटम तकनीक आने पर उसे डिकोड किया जा सके। सरकार इस खतरे को पहले ही भांप चुकी है और इसे रोकने के लिए 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' को जरूरी बना दिया है।
कौन कर रहा है नेतृत्व?
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए State Bank of India (SBI) के चेयरमैन की अध्यक्षता में एक वर्किंग ग्रुप काम कर रहा है। वहीं, Reserve Bank of India (RBI) ने Q-SAFE (Quantum Secure and Adaptive Financial Ecosystem) नाम से एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है, जो पूरे रोडमैप को तैयार कर रही है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
शेयरधारकों के लिए यह बड़ा बदलाव है। बैंकों को अपने पुराने सिस्टम (Legacy Systems) को अपग्रेड करने के लिए भारी निवेश करना होगा। इससे कंपनियों के शॉर्ट-टर्म ऑपरेटिंग खर्च बढ़ सकते हैं। अब मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि बैंक इन सुरक्षा मानकों को बिना मुनाफा प्रभावित किए और बिना सर्विस में रुकावट आए कैसे लागू करते हैं। साथ ही, बैंकों को 'क्रिप्टो-एजिलिटी' बनाए रखनी होगी ताकि वे भविष्य के खतरों के लिए तुरंत तैयार रह सकें।
