बाजार में दिखा मिला-जुला रुख: MTF में गिरावट पर सालाना ग्रोथ दमदार
भारतीय शेयर बाज़ारों में मार्च के महीने में मिले-जुले संकेत देखने को मिले। मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) का कुल पोर्टफोलियो पिछले महीने के मुकाबले 5.6% गिरकर ₹1.13 ट्रिलियन पर आ गया। यह लगातार दूसरा महीना है जब MTF बुक में गिरावट दर्ज की गई है, जो ग्लोबल अनिश्चितताओं और बाज़ार की अस्थिरता के बीच निवेशकों की बढ़ती सतर्कता की ओर इशारा करता है। हालांकि, बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें तो MTF बुक में पिछले साल के मुकाबले 57.1% की शानदार बढ़ोतरी हुई है, जो लीवरेज्ड ट्रेडिंग (leveraged trading) की मांग को दर्शाता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इस सेगमेंट में 95% से ज़्यादा की हिस्सेदारी के साथ हावी है, जिसकी MTF बुक में सालाना 58.6% का इजाफा हुआ और यह ₹1.09 ट्रिलियन तक पहुंच गई। वहीं, BSE Ltd के MTF पोर्टफोलियो में सालाना ग्रोथ थोड़ी धीमी, 23.7% रही।
बाज़ार की ओवरऑल एक्टिविटी अभी भी मज़बूत
लीवरेज्ड ट्रेडिंग में थोड़ी नरमी के बावजूद, बाज़ार की समग्र गतिविधि मज़बूत बनी हुई है। डेरिवेटिव्स और इक्विटी सेगमेंट में औसत दैनिक टर्नओवर (average daily turnover) पिछले साल के मुकाबले 46.5% बढ़कर ₹517.7 ट्रिलियन तक पहुँच गया। यह बढ़ोतरी डेरिवेटिव्स में मज़बूत ट्रेडिंग और अस्थिरता भरे दौर में ज़्यादा भागीदारी से हुई है। कैश मार्केट (cash market) के टर्नओवर में भी पिछले साल के मुकाबले लगभग 29% की वृद्धि देखी गई, जो विभिन्न सेगमेंट में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी का संकेत देता है, भले ही लीवरेज को लेकर थोड़ी सावधानी बढ़ी हो।
एक्सचेंज वैल्यूएशन्स और बाहरी दबाव बढ़े
सार्वजनिक रूप से लिस्टेड एक्सचेंजों के वैल्यूएशन्स (valuations) पर भी पैनी नज़र रखी जा रही है। BSE Ltd के शेयर फिलहाल 53x और 65x के ट्रेलिंग बारह-माह P/E रेशियो के बीच ट्रेड कर रहे हैं, जो वैश्विक साथियों जैसे Nasdaq Inc और Intercontinental Exchange Inc (जो 20s के ऊपरी स्तर पर ट्रेड करते हैं) की तुलना में प्रीमियम पर है। भारत के Nifty 50 इंडेक्स का P/E लगभग 21.1 और BSE SENSEX का लगभग 20.370 है। भू-राजनीतिक तनाव भारतीय बाज़ारों को प्रभावित कर रहा है, खासकर पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के कारण बड़े करेक्शन देखे गए। 30 मार्च 2026 को, ईरान और इज़रायल के बीच संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण Sensex और Nifty 50 में बड़ी गिरावट आई थी। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) फिलहाल $115.1 प्रति बैरल पर है। कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी लगातार वृद्धि भारत की आयात लागत, कॉर्पोरेट मुनाफे और समग्र आर्थिक भावना को भारी रूप से प्रभावित करेगी, जिससे निवेशक और अधिक सतर्क हो सकते हैं और ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो सकते हैं।
रेगुलेटरी माहौल और विश्लेषकों की राय
नियामक बदलाव (regulatory changes) अनिश्चितता की एक और परत जोड़ते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में नए कैपिटल मार्केट एक्सपोज़र नियमों को 1 जुलाई, 2026 तक के लिए टाल दिया है, जिससे ब्रोकर्स को सख्त उधार आवश्यकताओं से अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, मूल प्रस्ताव अभी भी मौजूद हैं, जो बाद में ट्रेडिंग वॉल्यूम और फाइनेंसिंग स्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार के राजस्व को बढ़ाने के उद्देश्य से, FY27 के लिए डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में अपेक्षित वृद्धि, ट्रेडिंग गतिविधि और लिक्विडिटी (liquidity) को कम कर सकती है। कई बाज़ार प्रतिभागियों ने मंदी की चेतावनी दी है। विश्लेषकों का BSE पर आम तौर पर सकारात्मक रुख है, जिसमें 'Buy' रेटिंग और बाज़ार के उतार-चढ़ाव और नए इंडेक्स लॉन्च से जुड़े हालिया स्टॉक अस्थिरता के बावजूद ₹3,050-₹3,430 के बीच प्राइस टारगेट हैं।