₹8.1 लाख करोड़ का बकाये का संकट
भारत के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को अपने ग्राहकों से समय पर भुगतान न मिलने के कारण गंभीर वर्किंग कैपिटल (Working Capital) की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अनुमान है कि MSMED Act में तय समय-सीमाओं को पार करते हुए ₹8.1 लाख करोड़ रुपये अनपेड इनवॉइस (Unpaid Invoices) में फंसे हुए हैं। इन बड़ी देरी का सीधा असर कंपनियों के ज़रूरी कामों, जैसे सैलरी भुगतान और कच्चा माल खरीदने पर पड़ रहा है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनकी फाइनेंसियल गुंजाइश (Financial Reserves) कम है।
सप्लाई चेन और क्रेडिट पर व्यापक असर
इन अटके हुए भुगतानों का असर सप्लाई चेन (Supply Chain) में दूर-दूर तक महसूस होता है। छोटी कंपनियां अक्सर अपने सप्लायर्स (Suppliers) को भुगतान में देरी करती हैं या फिर महंगे अनौपचारिक लोन (Informal Loans) का सहारा लेती हैं, जिससे उनका मुनाफा कम हो जाता है। इस समस्या को और बढ़ाते हुए, कई MSMEs के लिए फॉर्मल लोन (Formal Loan) लेना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा अक्सर उनके फाइनेंसियल रिकॉर्ड (Financial Records) के असंगत होने या कैश फ्लो (Cash Flow) में उतार-चढ़ाव के कारण होता है, जिससे पारंपरिक लेंडर्स (Lenders) के लिए उनकी लोन चुकाने की क्षमता का आकलन करना मुश्किल हो जाता है।
लिक्विडिटी के लिए नए साधन: TReDS और अन्य
Trade Receivables Discounting System (TReDS) जैसे प्लेटफॉर्म्स इस पेमेंट की अड़चन को दूर करने के लिए प्रमुख समाधान बनकर उभर रहे हैं। TReDS MSMEs को अपने स्वीकृत इनवॉइस (Approved Invoices) को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेचकर जल्दी कैश (Cash) हासिल करने की सुविधा देता है, जो खरीदार (Buyer) की क्रेडिट-वर्दीनेस (Creditworthiness) पर आधारित होता है। पॉलिसी स्तर पर भी कई पहलें की जा रही हैं, जैसे Central Public Sector Enterprises (CPSEs) को TReDS से जुड़ने के लिए अनिवार्य करना और क्रेडिट गारंटी प्रोग्राम (Credit Guarantee Programs) को बढ़ाना, जिनका मकसद इनवॉइस फाइनेंसिंग (Invoice Financing) को मज़बूत करना और समय पर भुगतान को प्रोत्साहित करना है।
जमीनी स्तर पर अमल पर निर्भरता
एक्सपर्ट्स का मानना है कि MSMEs के कैश फ्लो (Cash Flow) में सुधार केवल नीतिगत बयानों के बजाय उन नीतियों को ज़मीनी हकीकत में बदलने पर निर्भर करता है। मुख्य कदमों में मौजूदा नियमों का इस्तेमाल करके पेमेंट डिसिप्लिन (Payment Discipline) लागू करना, ज़्यादा से ज़्यादा व्यवसायों को इनवॉइस फाइनेंसिंग (Invoice Financing) का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना और क्रेडिट असेसमेंट (Credit Assessment) के लिए डिजिटल टूल्स (Digital Tools) के उपयोग को तेज़ करना शामिल है। इस पूरी सफलता के लिए बड़ी कंपनियों, लेंडर्स (Lenders) और MSMEs की सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ पेमेंट की समय-सीमाओं का लगातार प्रवर्तन (Enforcement) आवश्यक होगा।
