MSME लोन में बंपर उछाल! NBFCs ने बढ़ाई रफ्तार, शेयर बढ़ा ₹47.8 लाख करोड़ तक

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
MSME लोन में बंपर उछाल! NBFCs ने बढ़ाई रफ्तार, शेयर बढ़ा ₹47.8 लाख करोड़ तक
Overview

भारत में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलने वाले कर्ज़ में पिछले साल के मुकाबले **14.9%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिसंबर 2025 तक यह कुल **₹47.8 लाख करोड़** तक पहुंच गया है, जो कि बाज़ार में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।

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NBFCs की बढ़ती पैठ

भारत का MSME क्रेडिट बाज़ार अब ₹47.8 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। यह ग्रोथ दिखाती है कि लोन देने के तरीके बदल रहे हैं और वित्तीय सेवाओं की पहुँच बढ़ रही है।

खास बात यह है कि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) अब इस बाज़ार में एक बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। दिसंबर 2025 तक, उन्होंने MSME लोन मार्केट में 28% हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जो पिछले साल के 26.8% से ज़्यादा है। एकल उद्यमी (Sole Proprietors) के लिए दिए जाने वाले कर्ज़ में NBFCs का हिस्सा 41.6% है। जहाँ बैंक पारंपरिक रूप से बड़े कारोबारों पर ध्यान देते हैं, वहीं NBFCs ने MSME लेंडिंग में बैंकों के मुकाबले कहीं ज़्यादा तेज़ी दिखाई है। FY21-FY24 के बीच NBFCs की ग्रोथ 32% रही, जबकि प्राइवेट बैंकों की 20.9% और सरकारी बैंकों की 10.4% रही। ₹10 लाख से कम के छोटे प्रॉपर्टी-बैक्ड लोन में NBFCs का दबदबा है, जहाँ वे 45% शेयर रखती हैं। यह दिखाता है कि NBFCs कम मार्जिन और बढ़ी हुई क्रेडिट लागत के बावजूद, ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहकों तक पहुंचने के लिए छोटे, सुरक्षित लोन पर फोकस कर रही हैं। अनुमान है कि FY26 में NBFCs MSME लेंडिंग में 20% की ग्रोथ जारी रखेंगी।

एकल उद्यमी बन रहे हैं ग्रोथ के हीरो

इस पूरे सेगमेंट में एकल उद्यमी (Sole Proprietors) रीढ़ की हड्डी साबित हो रहे हैं। वे कुल आउटस्टैंडिंग लोन का लगभग 80% और कर्ज़दारों का 73% हिस्सा हैं। दिसंबर 2025 तक लोन अप्रूवल 13.3% साल-दर-साल बढ़ा, जिसमें एकल उद्यमियों के लोन 15% की दर से तेज़ी से बढ़े। अब ज़्यादा महिलाएं (23.9% नए लोन में) और युवा (<35 साल) भी लोन ले रहे हैं। एकल उद्यमियों के लिए औसत लोन साइज़ ₹3.34 लाख पर स्थिर रहा। नए-से-क्रेडिट (NTC) बॉरोअर्स, जो औपचारिक वित्तीय सिस्टम में नए हैं, एकल उद्यमी लोन का 23.3% हिस्सा रखते हैं। इससे लोन लेने वालों के रिस्क प्रोफाइल में सुधार दिख रहा है, जहाँ अब कम-जोखिम वाले ग्राहक ज़्यादा हैं।

छोटे शहरों और जिलों तक पहुंची क्रेडिट की पहुँच

सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, अब क्रेडिट छोटे शहरों (BT100) में भी पहुंच रहा है, जो एकल उद्यमी क्रेडिट का लगभग 40% हिस्सा है। साथ ही, वित्तीय रूप से विकसित हो रहे 'एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स' में क्रेडिट 18.4% बढ़कर ₹3.2 लाख करोड़ हो गया है, जो बाज़ार की औसत ग्रोथ से ज़्यादा है। गुजरात जैसे राज्यों में छोटे उद्योगों के लोन 11.8% बढ़कर ₹3.9 लाख करोड़ हो गए हैं, और यहाँ एसेट क्वालिटी भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर है, जहाँ 91-180 दिनों के ओवरड्यू लोन सिर्फ 0.9% हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 1.3% है।

आगे की राह में संभावित जोखिम

तेज़ ग्रोथ के बावजूद, कुछ जोखिम भी हैं। NBFCs पर बढ़ती निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है। छोटे NBFCs को अक्सर फंड जुटाने में ज़्यादा लागत आती है। अगर नियमों में सख्ती हुई या ब्याज दरों में बदलाव आया, तो ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। छोटे प्रॉपर्टी-बैक्ड लोन (माइक्रो-LAP) में ओवरड्यू रेट ज़्यादा देखा गया है। साथ ही, नए-से-क्रेडिट बॉरोअर्स की बढ़ती संख्या, अगर उनकी भुगतान क्षमता की ठीक से जांच न की जाए, तो जोखिम पैदा कर सकती है। एकल उद्यमियों के लिए लोन अप्रूवल भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि उनके वित्तीय रिकॉर्ड उतने औपचारिक नहीं होते।

भविष्य का नज़रिया

MSME क्रेडिट बाज़ार में ग्रोथ जारी रहने और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में सुधार की उम्मीद है। NBFCs अपनी फ्लेक्सिबिलिटी और खास सेगमेंट पर फोकस के कारण इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखेंगी। क्रेडिट का औपचारिकीकरण, नए बॉरोअर्स का आना और बेहतर रिस्क प्रोफाइल वित्तीय सिस्टम को मज़बूत बनाएंगे। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में क्रेडिट का विस्तार व्यापक आर्थिक विकास की ओर इशारा करता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि 2026 में MSME लेंडिंग, सरकारी योजनाओं और बेहतर लोन अप्रूवल तरीकों के सहारे, क्रेडिट विस्तार का एक बड़ा ड्राइवर बनी रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.