नई टेक्नोलॉजी का तड़का, पुरानी कंपनियों में खलबली
यह सिर्फ एक अनुमान नहीं, बल्कि इंडस्ट्री में बड़े बदलाव का संकेत है। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और ग्लोबल दिग्गज ब्लैकरॉक के इस अलायंस से 'अलादीन' प्लेटफॉर्म के ज़रिए ज़बरदस्त टेक्नोलॉजिकल फायदा मिलेगा। यह टेक्नोलॉजी रिस्क मैनेजमेंट, पोर्टफोलियो बनाने और ट्रेडिंग के लिए बेहद एडवांस्ड है। इस वेंचर को अक्टूबर 2024 में SEBI की इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिली और मई 2025 में फाइनल अप्रूवल के बाद, जुलाई 2025 में JioBlackRock म्यूचुअल फंड ने अपना काम शुरू कर दिया। इस तेज़ शुरुआत से भारतीय एसेट मैनेजमेंट सेक्टर में हलचल मचना तय है, खासकर उन बैंकों के लिए जो फाइनेंसियल सर्विसेज़ में गहराई से जुड़े हैं। उन्हें अपनी रणनीति और कामकाज के तरीके बदलने होंगे।
AUM में ज़बरदस्त उछाल, निवेशकों का भरोसा बढ़ा
अगर इंडस्ट्री की पिछली ग्रोथ देखें, तो यह वाकई शानदार रही है। दिसंबर 2015 में जहां इंडस्ट्री का AUM ₹12.75 लाख करोड़ था, वहीं दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर ₹80.23 लाख करोड़ हो गया, यानी छह गुना से ज़्यादा की बढ़त। पिछले पांच सालों में AUM लगभग तीन गुना हो गया। निवेशकों के खातों (folios) की संख्या भी बढ़कर 26.13 करोड़ हो गई है, जिसमें 20 करोड़ से ज़्यादा शेयर, हाइब्रिड और सोल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स में हैं। ओपन-एंडेड इक्विटी फंड्स का प्रदर्शन खास रहा, जिनका AUM नवंबर 2020 के ₹9 लाख करोड़ से बढ़कर नवंबर 2025 तक करीब ₹36 लाख करोड़ हो गया। फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने तो 25% से ज़्यादा की ग्रोथ दिखाई।
भविष्य की राह और कॉम्पिटिशन
फिलहाल, इंडस्ट्री में SBI म्यूचुअल फंड (लगभग ₹9.5 लाख करोड़ AUM), HDFC म्यूचुअल फंड (लगभग ₹7.5 लाख करोड़ AUM) और ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड (लगभग ₹6.5 लाख करोड़ AUM) जैसे पुराने प्लेयर्स का दबदबा है। लेकिन JioBlackRock अपनी टेक्नोलॉजी के दम पर इस समीकरण को बदलने की कोशिश करेगा। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, जैसे ICRA Analytics, का मानना है कि 2035 तक यह सेक्टर ₹300 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर सकता है। SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) का बढ़ता चलन और छोटे शहरों तक पहुंच इस ग्रोथ को और बढ़ाएगी। दूसरे प्लेयर्स भी अपनी डिजिटल सुविधाओं को बेहतर बना रहे हैं और नए पार्टनरशिप की तलाश में हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा से फीस में कमी आने की भी उम्मीद है।
