एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी में बड़ा बदलाव
IRDAI ने बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के वेतन को लेकर नए नियम तय किए हैं। वित्त वर्ष 2027 से, 50% प्रदर्शन मूल्यांकन सीधे ऑपरेशनल और गवर्नेंस से जुड़ा होगा। इसका मतलब है कि अब सिर्फ रेवेन्यू और प्रॉफिट जैसे वित्तीय नतीजों के आधार पर बोनस नहीं मिलेगा, बल्कि ग्राहकों को दी जाने वाली सर्विस की क्वालिटी भी अहम होगी।
परफॉरमेंस के लिए 6 नए पैमाने
सभी बीमा कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 तक अपनी पे-पॉलिसी में छह खास मापदंडों को शामिल करना होगा। इनमें कंपनी की वित्तीय स्थिरता, प्रोडक्ट परफॉरमेंस, दावों (Claims) के निपटारे में लगने वाला समय, ग्राहकों की शिकायतों का समाधान, भारतीय लेखांकन मानकों (Indian Accounting Standards) का पालन और ऑनलाइन सेवाओं में भ्रामक "डार्क पैटर्न्स" का खात्मा शामिल है।
इसके साथ ही, कंपनियों को अब तीन साल का परफॉरमेंस डेटा ऑनलाइन पब्लिश करना होगा। वित्तीय स्वास्थ्य की जानकारी तिमाही (Quarterly) आधार पर दी जाएगी, जबकि दावों के निपटारे और शिकायत समाधान जैसे ग्राहक-केंद्रित डेटा को मासिक (Monthly) आधार पर अपडेट करना होगा। इस पारदर्शिता से पॉलिसी होल्डर्स को अलग-अलग कंपनियों की सर्विस क्वालिटी की तुलना करने में मदद मिलेगी।
ऑपरेशनल और स्ट्रैटेजिक चुनौतियां
हालांकि इन नियमों का मकसद बीमा क्षेत्र में भरोसा फिर से जगाना है, लेकिन ये कंपनियां के लिए कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां भी खड़ी कर सकते हैं। एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी को सीधे सर्विस आउटकम से जोड़ने पर हो सकता है कि वे असल में कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के बजाय सिर्फ टारगेट को मैनेज करने पर ध्यान दें। ऐसा इतिहास में भी देखा गया है कि ऐसी इंसेंटिव स्ट्रक्चर कंपनियों को सिर्फ डेडलाइन पूरी करने के लिए प्रक्रियाओं को जल्दबाजी में निपटाने को प्रेरित कर सकती है।
छोटी बीमा कंपनियों को अपने पुराने IT सिस्टम को अपग्रेड करने और मासिक रिपोर्टिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी खर्च उठाना पड़ सकता है। इससे बड़ी और टेक्नोलॉजी में एडवांस कंपनियों और छोटी, पारंपरिक कंपनियों के बीच की खाई और बढ़ सकती है। अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी सीधे एग्जीक्यूटिव कम्पेंसेशन का हिस्सा बन गई है।
जांच और अमल को लेकर चिंताएं
आलोचकों का कहना है कि एग्जीक्यूटिव कम्पेंसेशन प्लान में पहले गलत बिक्री (Mis-selling) के लंबे समय के खतरों को नजरअंदाज किया जाता था। नए नियमों में "मैलस एंड क्लॉबैक" (Malus and Clawback) जैसे प्रावधान लाए गए हैं, जो एग्जीक्यूटिव्स को अनैतिक बिक्री प्रथाओं या बार-बार रेगुलेटरी उल्लंघन जैसे पिछले गलत कामों के लिए दंडित करेंगे। हालांकि, इस फ्रेमवर्क की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रेगुलेटर शिकायतों (Grievance) के डेटा की सटीक और लगातार रिपोर्टिंग सुनिश्चित कर पाता है या नहीं। बिना मजबूत, स्वतंत्र ऑडिट के, इस बात का जोखिम है कि सिस्टम के साथ छेड़छाड़ हो सकती है।
