RBI की **5 अक्टूबर** को होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले भारतीय कंपनियां फंड जुटाने की होड़ में हैं। रेपो रेट बढ़ने के जोखिम को देखते हुए कंपनियां पुरानी दरों पर ही लोन लॉक कर रही हैं ताकि भविष्य में ब्याज का बोझ न बढ़े।
बाजार में मची हलचल
भारतीय कॉरपोरेट्स इस वक्त डेट मार्केट में पूरी तरह एक्टिव हैं। कंपनियों को डर है कि 5 अक्टूबर को होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट में इजाफा हो सकता है। इसी अनिश्चितता को दूर करने के लिए कंपनियां अभी मौजूदा ब्याज दरों पर ही बड़ी पूंजी जुटा रही हैं।
सितंबर का डेटा
डेटा पर नजर डालें तो सितंबर महीने में प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए कॉर्पोरेट डेट जुटाने का आंकड़ा ₹76,026 करोड़ तक पहुंच गया है, जो अगस्त के ₹67,006 करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह दिखाता है कि कंपनियां आने वाली तिमाहियों के लिए अपनी फाइनेंशियल कॉस्ट को फिक्स करना चाहती हैं।
प्रमुख खिलाड़ी और रणनीति
इस दौड़ में सबसे बड़ा नाम Reliance Industries का है, जिसने ₹12,500 करोड़ का बॉन्ड इश्यू 7.47% ब्याज दर पर लॉन्च किया है। सिर्फ रिलायंस ही नहीं, फाइनेंशियल सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे Canara Bank, Bajaj Finance, Tata Capital, REC और Shriram Finance भी फंड जुटाने में पीछे नहीं हैं।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
भले ही मौजूदा दरों पर फंड उठाना समझदारी भरा कदम हो, लेकिन बढ़ता कर्ज बैलेंस शीट पर दबाव भी बना सकता है। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनियां इस पैसे का इस्तेमाल कहां कर रही हैं। यदि इसका इस्तेमाल विस्तार या महंगे पुराने कर्ज को चुकाने में हो रहा है, तो यह लॉन्ग टर्म के लिए अच्छा है। हालांकि, अगर कर्ज सिर्फ लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए लिया जा रहा है, तो यह भविष्य के मार्जिन पर असर डाल सकता है। अगली तिमाही के नतीजों में इन कंपनियों के Debt-to-Equity Ratio पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
