बढ़ते जोखिमों का माहौल: GST और बैंकिंग सेक्टर पर बढ़ी नजर
देश में कंपनियों के लिए रेगुलेटरी (नियामकीय) माहौल लगातार कड़ा होता जा रहा है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के नियमों का पालन न करने पर अब भारी जुर्माना, क्रेडिट ब्लॉक करने और बैंक खाते फ्रीज करने जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। खास तौर पर ₹5 करोड़ से अधिक के अंतर (discrepancies) के मामलों में गिरफ्तारी तक हो सकती है। 2026 के लिए नए नियम कंप्लायंस को और भी सख्त बना रहे हैं, जिसमें ई-इनवॉइसिंग और ट्रैक-एंड-ट्रेस नियमों का पालन न करने पर भारी पेनल्टी शामिल है।
इसी बीच, IDFC First Bank ने अपने चंडीगढ़ ब्रांच में सरकारी खातों से जुड़े ₹590 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा किया है। इस घटना के बाद हरियाणा सरकार ने बैंक को सरकारी बिज़नेस के लिए डि-एम्पेनल (de-empanel) कर दिया है। यह फ्रॉड बैंक के तिमाही मुनाफे से भी ज़्यादा है, जिससे ऑपरेशनल कंट्रोल और गवर्नेंस पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट (forensic audit) शुरू कर दिया गया है।
IT सेक्टर पर AI का साया: भविष्य को लेकर चिंता
भारतीय इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण बड़े बदलावों से गुजर रहा है। ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने Infosys, TCS और HCLTech सहित 6 प्रमुख IT कंपनियों के शेयरों को डाउनग्रेड कर दिया है। उनका मानना है कि AI पारंपरिक मैनेज्ड सर्विसेज (managed services) को काफी हद तक ऑटोमेट कर सकता है, जिससे इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल और रेवेन्यू (राजस्व) में गिरावट आ सकती है। सबसे खराब स्थिति में, Jefferies का अनुमान है कि इन कंपनियों के वैल्यूएशन (valuation) में 30% से 65% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) भी इस सेक्टर से बड़ी मात्रा में पैसा निकाल रहे हैं, जो मौजूदा आउटसोर्सिंग मॉडल्स को लेकर उनकी शंका को दर्शाता है।
डिफेंस सेक्टर की चमक: सरकार का फोकस बना सहारा
IT सेक्टर की चुनौतियों के विपरीत, डिफेंस सेक्टर मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है। Morgan Stanley ने Solar Industries India Ltd. पर 'ओवरवेट' (Overweight) रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है, जिसमें 21% से अधिक के अपसाइड का टारगेट प्राइस दिया गया है। सरकारी आधुनिकीकरण, 'मेक इन इंडिया' पहल और एक्सपोर्ट (निर्यात) में बढ़ोतरी डिफेंस कंपनियों के लिए प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर्स (growth drivers) साबित हो रहे हैं। डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वदेशीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव: BSE पिछड़ा, NSE आगे
एक्सचेंज (exchange) के मोर्चे पर, BSE इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में अपनी हिस्सेदारी खो रहा है। फरवरी 2026 में, BSE का मार्केट शेयर 30% तक गिर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का शेयर बढ़कर 70% हो गया। इंडस्ट्री में एवरेज डेली टर्नओवर (average daily turnover) में 14% की महीने-दर-महीने गिरावट देखी गई, जो रिटेल निवेशकों की कम भागीदारी का संकेत है। BSE के फ्यूचर्स एवरेज डेली टर्नओवर में 20% की बड़ी गिरावट आई है, जो इसे वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
