गोल्ड लोन का रिकॉर्ड उछाल!
भारत में सोने के बदले कर्ज (Gold Loans) लेने का चलन अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च तक गहनों पर बैंक लोन पांच गुना बढ़कर ₹4.6 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 123% की जबरदस्त वृद्धि है, जिसने इसे भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्रेडिट सेक्टर बना दिया है।
क्यों बढ़ी गोल्ड लोन की मांग?
इस boom के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे पहले, सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है। 2025 के दौरान सोने का भाव ₹1.32 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया और फरवरी 2026 तक यह ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इन बढ़ी हुई कीमतों का मतलब है कि लोग अपने सोने के भंडार पर ज्यादा लोन ले पा रहे हैं, जिससे सोना वैल्यू स्टोर के साथ-साथ तुरंत कैश का जरिया बन गया है।
दूसरा, आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ती महंगाई और नौकरियों को लेकर चिंता के चलते, लोग अब सुरक्षित लोन (Secured Loans) को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। गोल्ड लोन की खासियत है कि इसकी मंजूरी जल्दी मिलती है, कागजी कार्रवाई आसान होती है, और अक्सर अनसिक्योर्ड लोन के मुकाबले ब्याज दरें भी कम होती हैं।
कहां गिरावट, कहां तेजी?
यह ट्रेंड तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम इसे दूसरी तरफ देखते हैं। जहां गोल्ड लोन तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (जैसे फ्रिज, टीवी) के लिए लोन 5.3% घटकर ₹21,962 करोड़ रह गया है। इसी तरह, एक्सपोर्ट क्रेडिट में भी 8.4% की गिरावट आई है, जो अब ₹11,436 करोड़ पर है। यह दिखाता है कि लोग अपने जरूरी खर्चों के लिए सोना गिरवी रख रहे हैं, जबकि गैर-जरूरी सामानों की मांग और विदेशी व्यापार में नरमी है। ओवरऑल पर्सनल लोन 16.2% बढ़े हैं, लेकिन इसमें गोल्ड लोन का बड़ा योगदान माना जा रहा है, जबकि क्रेडिट कार्ड जैसे अन्य रिटेल क्रेडिट में नरमी देखी गई है।
भविष्य और जोखिम
फॉर्मल गोल्ड लोन मार्केट के मार्च 2026 तक ₹15 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें बैंकों की हिस्सेदारी 82% होगी। यह दिखाता है कि गोल्ड लोन अब सिर्फ इमरजेंसी के लिए नहीं, बल्कि बिजनेस चलाने और रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी एक प्रमुख जरिया बन गया है।
हालांकि, इस तेजी के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। लोन की रकम बढ़ने और कई लोन लेने वाले लोगों की वजह से कर्ज का बोझ बढ़ सकता है और डिफॉल्ट का खतरा भी। RBI के आंकड़ों के अनुसार, ₹2.5 लाख से अधिक के गोल्ड लोन लेने वाले लोगों के डिफॉल्ट करने की संभावना आम बरोअर से 2.2 गुना ज्यादा है। इसके अलावा, सोने की कीमतों में अचानक गिरावट इस सेक्टर के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकती है, जिससे लोन की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। मूल्यांकन (Appraisal) और निगरानी (Monitoring) में खामियां भी चिंता का विषय हैं।
