सोने के दामों ने क्यों मचाई गोल्ड लोन में धूम?
भारत का रिटेल क्रेडिट मार्केट (Retail Credit Market) इन दिनों गोल्ड लोन की वजह से फल-फूल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2025 तिमाही में गोल्ड लोन की ओरीजिनेशन वैल्यू (Origination Value) पिछले साल के मुकाबले 108% की वृद्धि के साथ कहीं ज्यादा बढ़ी है। यह आंकड़ा लोन की वॉल्यूम (Loan Volumes) में हुई 45% की वृद्धि से कहीं ज्यादा है। इसका सीधा मतलब है कि ज्यादा लोग लोन नहीं ले रहे, बल्कि उनके पास मौजूद सोने की कीमत ही इतनी बढ़ गई है कि उस पर मिलने वाले लोन की वैल्यू लगभग दोगुनी (1.8 गुना) हो गई है।
2023 की शुरुआत से सोने के भाव दोगुने से भी ज्यादा हो चुके हैं। इसी वजह से गोल्ड लोन अब रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है, जो कुल लोन ओरीजिनेशन वैल्यू का 39% और वॉल्यूम का 36% कवर कर रहा है।
सिर्फ दक्षिण भारत ही नहीं, अब हर जगह गोल्ड लोन का जलवा
यह ग्रोथ अब सिर्फ पारंपरिक रूप से मजबूत दक्षिणी राज्यों तक सीमित नहीं है। बल्कि, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि, कर्जदारों की प्रोफाइल में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। ज्यादातर कर्जदार अभी भी 35 साल से ऊपर के हैं, जो सेमी-अर्बन या ग्रामीण इलाकों से हैं और प्राइमरली क्रेडिट कैटेगरी (Prime Credit Categories) में आते हैं। इससे पता चलता है कि लेंडर्स अपने मौजूदा कस्टमर बेस पर ही ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
सोने के दामों पर निर्भरता: लेंडर्स के लिए बड़ा खतरा?
हालांकि, गोल्ड लोन सेक्टर की यह तेजी सोने के दामों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। अगर सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई, तो कर्जदारों की लोन चुकाने की क्षमता पर भारी असर पड़ सकता है, जिससे लेंडर्स (बैंक्स और एनबीएफसी) के लिए बड़े क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) पैदा हो सकते हैं। पर्सनल लोन या होम लोन की तरह, जिनका वैल्यूएशन इनकम या प्रॉपर्टी जैसे स्थिर फैक्टर पर आधारित होता है, गोल्ड लोन का पूरा ढांचा ग्लोबल कमोडिटी मार्केट्स (Global Commodity Markets) की अस्थिरता से जुड़ा हुआ है।
यह मॉडल, बढ़ती एसेट वैल्यू पर आधारित है, न कि वास्तविक मांग पर। यह एक बड़ी चिंता का विषय है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी इन ट्रेंड्स पर बारीक नजर रखे हुए है। अगर RBI को यह सट्टेबाजी (Speculation) से प्रेरित बुलबुला लगा, तो वह रेगुलेटरी (Regulatory) नियम या लोन-टू-वैल्यू (Loan-to-Value) लिमिट्स को और सख्त कर सकता है। बैंक्स और फिनटेक लेंडर्स (Fintech Lenders) से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी गोल्ड लोन कंपनियों के लिए एक चुनौती है।
भविष्य कैसा होगा गोल्ड लोन का?
आगे गोल्ड लोन की ग्रोथ काफी हद तक सोने के दामों पर ही निर्भर करेगी, जिससे असली कर्जदार की मांग छिपी रह सकती है। कई एनालिस्ट्स (Analysts) इस बात को लेकर सतर्क हैं कि गोल्ड लोन पर ज्यादा निर्भर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) के शेयर की कीमतें भी सोने के दामों के पूर्वानुमानों के प्रति बेहद सेंसिटिव (Sensitive) हैं।
इस ग्रोथ मॉडल की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी (Long-term viability) सोने के दामों के लगातार बढ़ते रहने पर टिकी है। यदि कीमतें गिरती हैं, तो मौजूदा क्रेडिट एक्सपेंशन (Credit Expansion) तुरंत एक गंभीर समस्या बन सकता है, जिससे कर्जदारों के पैसे डूब सकते हैं और लेंडर्स की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर भी बुरा असर पड़ सकता है।