गोल्ड लोन का बूम: **3.8 गुना** बढ़ा मार्केट, पर डिफॉल्ट का डर भी हावी! RBI की नई गाइडलाइन्स से निवेशकों में हलचल

BANKINGFINANCE
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AuthorAditya Rao|Published at:
गोल्ड लोन का बूम: **3.8 गुना** बढ़ा मार्केट, पर डिफॉल्ट का डर भी हावी! RBI की नई गाइडलाइन्स से निवेशकों में हलचल
Overview

भारत में गोल्ड लोन मार्केट में एक अभूतपूर्व उछाल देखा गया है। मार्च **2022** से अब तक, लोन बैलेंस **3.8 गुना** बढ़कर कुल रिटेल क्रेडिट का **11.1%** तक पहुँच गया है, जो इसे होम लोन के बाद दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी बनाता है। हालांकि, इस ज़बरदस्त ग्रोथ के साथ ही डिफॉल्ट (Default) के खतरे भी बढ़ गए हैं, खासकर उन बरोअर्स (Borrowers) के लिए जिन्होंने बड़ी रकम के या कई लोन लिए हैं।

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गोल्ड लोन में बम्पर तेजी, उधार लेने वालों का प्रोफाइल बदला

देश का गोल्ड लोन मार्केट रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। मार्च 2022 से अब तक लोन बैलेंस 3.8 गुना बढ़कर कुल रिटेल क्रेडिट का 11.1% हो गया है, जो होम लोन के बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। औसत लोन अमाउंट ₹90,000 से बढ़कर ₹1.96 लाख से ज़्यादा हो गया है। अब ज़्यादा अनुभवी और क्रेडिट-टेस्टेड लोग लोन ले रहे हैं। 2025 तक प्राइम और उससे ऊपर के बरोअर्स (Borrowers) का हिस्सा 43% से बढ़कर 52% हो गया है। महिला बरोअर्स भी इस ग्रोथ का एक बड़ा कारण हैं, जो 2025 में 39% लोन ले रही थीं। पब्लिक सेक्टर बैंक अब गोल्ड लोन बैलेंस का 62% अपने पास रखते हैं, जबकि NBFCs का हिस्सा 11% है।

बड़े लोन, बड़े डिफ़ॉल्ट का खतरा?

इस तेज़ी के पीछे एक चिंताजनक तस्वीर भी है - डिफॉल्ट दरें (Delinquency Rates) बढ़ रही हैं। जिन बरोअर्स का गोल्ड लोन बैलेंस ₹2.5 लाख से ज़्यादा है, उनमें छोटे लोन अमाउंट वालों की तुलना में डिफॉल्ट दरें 2.2 गुना ज़्यादा हैं। 2025 की पहली छमाही में दिए गए लोन के लिए कुल डिफ़ॉल्ट दर 1.1% रही। करीब 48% बरोअर्स पर अब ₹2.5 लाख से ज़्यादा का लोन है, जो कि बड़ी रकम का लोन लेने की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है। दिसंबर 2025 तक हर बरोअर पर औसत बकाया लोन ₹3.1 लाख तक पहुँच गया था। ₹2.5 लाख से ज़्यादा लोन लेने वाले करीब आधे (46%) बरोअर्स के पास पांच से ज़्यादा अलग-अलग लोन अकाउंट्स भी हैं, जिससे डिफ़ॉल्ट का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

RBI का एक्शन, गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव

इन बढ़ते जोखिमों को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2026 से एक नया फ्रेमवर्क लागू कर रहा है। इसके तहत लोन-टू-वैल्यू (Loan-to-Value - LTV) अनुपात को टियर (Tiers) में बांटा गया है: ₹2.5 लाख तक के लोन के लिए 85%, ₹2.5-5 लाख के लिए 80%, और ₹5 लाख से ज़्यादा के लोन के लिए 75% LTV होगा। इसका मकसद सिर्फ कोलेटरल (Collateral) पर निर्भर रहने के बजाय, अत्यधिक उधार लेने पर लगाम लगाना है। इस बीच, सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मार्च 2026 में सोना 15% तक गिर गया, जो अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। कीमतों का यह उतार-चढ़ाव कोलेटरल की वैल्यू को खतरे में डालता है, जिससे लेंडर्स (Lenders) के लिए रिकवरी का जोखिम बढ़ जाता है।

गोल्ड लोन सेक्टर पर मंडरा रहे कई जोखिम

गोल्ड लोन सेक्टर के भविष्य पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब बरोअर्स अलग-अलग लेंडर्स से कई गोल्ड लोन लेते हैं, तो कुल कर्ज और जोखिम का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। लेयर्ड बोर्रोइंग (Layered Borrowing), जिसमें पहले से मौजूद असुरक्षित ऋण (Unsecured Debt) के ऊपर गोल्ड लोन लिया जाता है, वित्तीय दबाव को बढ़ाता है और भुगतान क्षमता को कम करता है, खासकर अगर आय बाधित हो। गोल्ड लोन का इस्तेमाल एक वित्तीय बैकअप के तौर पर बढ़ रहा है, खासकर उन बरोअर्स के लिए जिनका डिफ़ॉल्ट का इतिहास रहा है। यह संकेत देता है कि कुछ लोग इसे आखिरी सहारा के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। सोने की कीमतों में अचानक या लगातार गिरावट कोलेटरल वैल्यू को गंभीर रूप से कम कर सकती है, जिससे लेंडर्स के लिए पैसा वसूलना और मुश्किल हो जाएगा। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने सोने की कीमतों में गिरावट के कारण जोखिम बढ़ने की बात कही है।

आगे का रास्ता: सावधानी के साथ ग्रोथ

ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड लोन मार्केट के FY27 तक ₹18 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। बैंक, खासकर पब्लिक सेक्टर के बैंक, आक्रामक तरीके से अपना मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं और NBFCs को टक्कर दे रहे हैं। Muthoot और Manappuram जैसे प्रमुख NBFCs के वैल्यूएशन 15x से 17x FY26 अर्निंग्स के बीच ट्रेड कर रहे हैं, जो उम्मीद तो जगाता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की स्थिरता पर सावधानी भी बरतने का संकेत देता है। सेक्टर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि लेंडर्स ग्रोथ और सावधानीपूर्वक जोखिम प्रबंधन के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं, नई RBI गाइडलाइन्स का ठीक से पालन करते हैं, और सोने की कीमतों के उतार-चढ़ाव से कैसे निपटते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.