'विकसित भारत' के लिए वित्तीय रीढ़ मजबूत: सरकार का दो-तरफा वार!
'विकसित भारत' 2047 के सपने को साकार करने के लिए सरकार एक बड़ी वित्तीय रीस्ट्रक्चरिंग पर काम कर रही है। इस दिशा में दो अहम कदम उठाए गए हैं। पहला, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) के मर्जर को सैद्धांतिक मंजूरी मिलना। दूसरा, देश के बैंकिंग सेक्टर को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए एक 'हाई-लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत' का गठन। इन कदमों का मकसद भारत को एक मजबूत, कुशल और बड़े पैमाने की वित्तीय ताकत बनाना है, जो देश की बढ़ती आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके।
PFC और REC का मिलन: इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में नई शक्ति
PFC के बोर्ड ने हाल ही में 6 फरवरी, 2026 को रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) के साथ अपने मर्जर के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इससे पहले, कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने PFC द्वारा REC में 52.63% हिस्सेदारी के अधिग्रहण को हरी झंडी दे दी थी, जिससे एक होल्डिंग-सब्सिडियरी स्ट्रक्चर तैयार होगा। यह कदम यूनियन बजट 2026-27 के उस लक्ष्य के अनुरूप है जिसमें सरकारी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के पैमाने और दक्षता को बढ़ाया जाना है।
बाजार में इस खबर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई। 6 फरवरी को PFC के शेयर 1.01% चढ़कर ₹419.20 पर बंद हुए, वहीं REC के शेयर 2.51% गिरकर ₹372.50 पर आ गए, जो शायद एकीकरण की जटिलताओं को लेकर निवेशकों की सावधानी को दर्शाता है। PFC, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹137,500 करोड़ और पी/ई (P/E) 4-5 है, तथा REC, जिसका मार्केट कैप करीब ₹100,600 करोड़ और पी/ई (P/E) 5.8 है, ये मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में एक बेहद मजबूत इकाई बनने की ओर अग्रसर हैं। मर्जर के बाद बनी कंपनी कंपनीज एक्ट, 2013 के तहत 'सरकारी कंपनी' का दर्जा बरकरार रखेगी। इस कंसॉलिडेशन का मुख्य उद्देश्य लेंडिंग प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, परिचालन ओवरलैप को कम करना और बड़े प्रोजेक्ट्स की फंडिंग के लिए सामूहिक वित्तीय क्षमता को बढ़ाना है।
'विकसित भारत' के लिए बैंकिंग की नई दिशा: हाई-लेवल कमेटी का गठन
इसी के साथ, फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 के भाषण के दौरान 1 फरवरी को 'हाई-लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत' के जल्द गठन का भी ऐलान किया। इस कमेटी का काम भारतीय बैंकिंग सेक्टर का व्यापक मूल्यांकन करना है ताकि इसे भारत की भविष्य की विकास यात्रा के साथ बेहतर ढंग से जोड़ा जा सके। कमेटी वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे मुद्दों पर जोर देगी। यह पहल भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा मजबूती को स्वीकार करती है, जिसमें मजबूत बैलेंस शीट, रिकॉर्ड मुनाफा और सुधरी हुई एसेट क्वालिटी शामिल है। कमेटी का एजेंडा सुधार-आधारित निरंतर विकास के लिए उपायों का मूल्यांकन करना और 2047 तक 'विकसित भारत' विजन की ओर क्षेत्र के विकास की योजना तैयार करना है। सरकार की मंशा वित्तीय संस्थानों को इतना सक्षम बनाना है कि वे एक विकसित राष्ट्र की महत्वपूर्ण वित्तपोषण मांगों को पूरा कर सकें। अभी की स्थिति यह है कि संपत्ति के हिसाब से दुनिया के टॉप 50 बैंकों में सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक ही शामिल है।
आगे की राह में चुनौतियां: इंटीग्रेशन का जोखिम और रेगुलेटरी बाधाएं
हालांकि, इन पहलों की पूरी क्षमता को साकार करने का रास्ता चुनौतियों से भरा है। PFC-REC मर्जर को लेकर निवेशकों की चिंताएं एकीकरण के जोखिमों और संभावित निष्पादन में देरी की ओर इशारा करती हैं। REC के शेयर में मर्जर की घोषणा के बाद आई गिरावट बाजार की घबराहट को दर्शाती है। इसके अलावा, इस मर्जर के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के NBFCs के लिए एक्सपोजर नॉर्म्स जैसी जटिल नियामक मंजूरियों से निपटना होगा। पैमाने और दक्षता बढ़ाने का लक्ष्य तो अच्छा है, लेकिन इन लाभों को हकीकत में बदलने में काफी समय और पैसा लग सकता है। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता इन जोखिमों के प्रभावी प्रबंधन और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की क्षमता पर निर्भर करेगी, खासकर जब बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की बात आती है।
भविष्य का नज़रिया: एक मजबूत वित्तीय ढांचा
'हाई-लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग' का गठन भारत के वित्तीय परिदृश्य को आकार देने के लिए एक दूरंदेशी कदम है। इसकी सिफारिशें अगले दो दशकों तक बैंकिंग सेक्टर के विकास की दिशा तय करेंगी, जो 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों से जुड़ी होंगी। PFC और REC का प्रस्तावित पुनर्गठन, बढ़ी हुई क्रेडिट डिस्बर्समेंट और तकनीकी अपनाई के जरिए भारत के आर्थिक विस्तार को सहारा देने वाले वित्तीय पावरहाउस बनाने की दिशा में पहला ठोस कदम है। लंबे समय का लक्ष्य एक लचीली, स्वायत्त और व्यापक वित्तीय प्रणाली को बढ़ावा देना है जो सभी आर्थिक क्षेत्रों में सतत विकास को गति दे सके।