भारत दुनिया के **49%** रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन संभाल रहा है, लेकिन अब फोकस वॉल्यूम से बढ़कर 'Trust By Default' यानी सुरक्षा पर शिफ्ट हो गया है। मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest में AI फ्रॉड से निपटने के लिए नई रणनीतियों पर मंथन हो रहा है, जिसका सीधा असर बैंकों और फिनटेक कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
भारत का फाइनेंशियल सेक्टर अब एक नए दौर में है। दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट का 49% हिस्सा भारत से आता है, ऐसे में मुंबई में 8 से 11 सितंबर 2026 तक चल रहे Global Fintech Fest में चर्चा का केंद्र 'Trust By Default' का कॉन्सेप्ट है। अब उद्योग का लक्ष्य केवल विस्तार नहीं, बल्कि सिस्टम की मजबूती है।
सुरक्षा अब प्राथमिकता
'Trust By Default' का मतलब है कि पेमेंट आर्किटेक्चर के मूल में ही सुरक्षा और फ्रॉड डिटेक्शन को शामिल किया जाए, न कि इसे बाद में एक फीचर की तरह जोड़ा जाए। AI एजेंट्स के बढ़ते चलन के कारण, जहां मशीनें बिना मानवीय हस्तक्षेप के पेमेंट कर रही हैं, वहां पुराने सुरक्षा उपाय अब नाकाफी साबित हो रहे हैं।
कंपनियों पर वित्तीय बोझ
इस बदलाव के लिए बैंकों, पेमेंट गेटवे और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को अब साइबर सिक्योरिटी, टोकनाइजेशन और AI-आधारित रिस्क इंटेलिजेंस सिस्टम पर भारी निवेश करना होगा। Reserve Bank of India और NPCI की बदलती रेगुलेटरी उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाना जरूरी है।
निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या यह बढ़ता खर्च कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) पर दबाव डालेगा। बड़ी कंपनियां शायद इस बोझ को संभाल लें, लेकिन छोटे प्लेयर्स के लिए कंप्लायंस और इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
मार्केट के लिए संकेत
ज्यादा सुरक्षा का मतलब कई बार जटिल प्रक्रिया भी होता है, जिससे यूजर एक्सपीरियंस पर असर पड़ सकता है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म में यही सिस्टम मजबूती की चाबी है। अब बाजार की नजरें लिस्टेड बैंकों और फिनटेक कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर टिकी हैं, जहां वे साइबर सुरक्षा के लिए किए जा रहे पूंजीगत खर्च और उससे मुनाफे पर पड़ने वाले असर के बारे में जानकारी देंगे।
