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India ECM Fees: निवेशकों की चमकी किस्मत? **39%** बढ़ी फीस, पर IB सेक्टर पर छाई मंदी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India ECM Fees: निवेशकों की चमकी किस्मत? **39%** बढ़ी फीस, पर IB सेक्टर पर छाई मंदी
Overview

भारतीय शेयर बाजारों में निवेश बैंकिंग (Investment Banking) की दुनिया में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। इक्विटी कैपिटल मार्केट्स (ECM) अंडरराइटिंग फीस पहली तिमाही **2026** में **39%** बढ़कर **$84.3 मिलियन** हो गई, जो **2018** के बाद से किसी भी पहली तिमाही के लिए सबसे बड़ा आंकड़ा है।

ECM फीस में बड़ा उछाल: वजह बड़े सौदे

दरअसल, भारत के इक्विटी कैपिटल मार्केट्स (ECM) में अंडरराइटिंग फीस पहली तिमाही 2026 में 39% बढ़कर $84.3 मिलियन पर पहुंच गई। यह 2018 के बाद किसी भी पहली तिमाही के लिए सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस जोरदार उछाल की मुख्य वजह कुछ बड़े और हाई-वैल्यू सौदे रहे। इनमें विशाल मेगा मार्ट में करीब ₹8,000 करोड़ का ब्लॉक ट्रेड, राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का ₹6,000 करोड़ का आईपीओ, और सरकार द्वारा BHEL में ₹4,000 करोड़ से अधिक का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल हैं। हालांकि, इन सफलताओं के बावजूद, कुल इक्विटी इश्यूएंस वॉल्यूम 9.3% गिरा और ऑफरिंग्स की संख्या 18.3% कम हुई। यह दिखाता है कि फीस में वृद्धि व्यापक बाजार वृद्धि के बजाय कुछ बड़े सौदों से आई है।

समूचे निवेश बैंकिंग बाजार में गिरावट

इसके विपरीत, समूचे निवेश बैंकिंग (Investment Banking) के फी पूल में तेज गिरावट दर्ज की गई। कुल फीस 31% घटकर $231.4 मिलियन पर आ गई, जो 2018 के बाद किसी भी पहली तिमाही के लिए सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट का कारण अन्य क्षेत्रों में भारी कमी रही। मर्जर और एक्विजिशन (M&A) एडवाइजरी फीस आधी रह गई, जो $71.9 मिलियन पर आ पहुंची। डेट कैपिटल मार्केट (DCM) अंडरराइटिंग फीस में 44% की भारी गिरावट आई और यह $47.2 मिलियन पर सीमित हो गई, जबकि सिंडिकेटेड लेंडिंग फीस 36% घटकर $28.1 मिलियन रह गई। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल कुछ खास हाई-वैल्यू इक्विटी सौदे ही सफल हो रहे हैं, जबकि अन्य डील-मेकिंग क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सतर्क निवेशक भावना ने इस ट्रेंड को और बढ़ाया है।

IPO बाजार में दिख रही कमजोरी

IPO मार्केट, जो ECM फीस में योगदान देता है, कमजोरी के संकेत दिखा रहा है। भले ही IPO प्रोसीड्स 7.8% बढ़कर $2.5 बिलियन हो गई, जो 2018 के बाद सबसे मजबूत पहली तिमाही रही, लेकिन IPOs की संख्या 14.1% गिर गई। डेटा यह भी दर्शाता है कि 2026 के IPOs ने 2024 और 2025 के IPOs की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। 2026 की पहली तिमाही में मेनबोर्ड के ग्यारह IPOs में से सात ने लिस्टिंग पर कमजोर या नकारात्मक गेन दिखाया, जो पिछले साल के उच्च निवेशक उत्साह से एक बड़ा बदलाव है। इससे पता चलता है कि निवेशक नए लिस्टिंग के लिए कम उत्साहित हो रहे हैं और कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

प्रमुख बैंकों का प्रदर्शन

एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने कुल निवेश बैंकिंग फीस में बाजी मारी, जिसने $21.9 मिलियन की फीस अर्जित की और 9.5% का मार्केट शेयर हासिल किया। इस बैंक की फीस में 182% की सालाना वृद्धि देखी गई। यह बैंक लगभग 14.13 के P/E रेश्यो और करीब ₹3.72 लाख करोड़ की मार्केट कैप के साथ ट्रेड कर रहा है। वहीं, कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ECM लीग टेबल में 12.4% शेयर के साथ शीर्ष पर रहा, जिसने $732.3 मिलियन की इक्विटी इश्यूएंस की। हालांकि, इसकी फीस में 40% की सालाना गिरावट आई। कोटक महिंद्रा बैंक का P/E रेश्यो लगभग 19.06 है और मार्केट कैप करीब ₹3.56 लाख करोड़ है। मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) ने भी मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की, जिसकी फीस 93% बढ़ी। एनालिस्ट्स बैंकिंग सेक्टर को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी हैं और बेहतर कैपिटल वाले बैंकों जैसे एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जोखिम: सौदों का संकेंद्रण और भू-राजनीतिक छाया

ECM फीस में दिख रहा headline ग्रोथ, कुछ प्रमुख सौदों पर अत्यधिक निर्भरता को उजागर करता है, जो व्यापक डील एक्टिविटी की कमी का संकेत देता है। M&A और DCM में तेज गिरावट, कम IPOs, और कमजोर लिस्टिंग परिणाम एक कमजोर निवेश बैंकिंग माहौल को दर्शाते हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, जिसमें कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी शामिल है, ने बाजार में महत्वपूर्ण अस्थिरता पैदा कर दी है। इससे 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट को बल मिल रहा है और भविष्य के डील प्लान में देरी हो सकती है या वे रुक सकते हैं। यह वैश्विक अनिश्चितता निवेशकों के रिस्क को देखने के तरीके को प्रभावित करती है और उभरते बाजारों के लिए उच्च रिस्क प्रीमियम का कारण बन सकती है। कुल मिलाकर फी पूल का निम्न स्तर, जो 2018 के बाद सबसे कमजोर पहली तिमाही है, यह दिखाता है कि मौजूदा ECM की मजबूती एक कठिन निवेश बैंकिंग बाजार में एक छोटा सा सकारात्मक पहलू है।

आउटलुक: सतर्क स्थिरीकरण की उम्मीद

बाजार पर्यवेक्षकों को उम्मीद है कि मौजूदा अस्थिरता और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण नज़दीकी अवधि में डील एक्टिविटी धीमी बनी रहेगी। बाजार की स्थिति स्थिर होने के बाद ही सुधार की उम्मीद है। फाइनेंशियल, एनर्जी और रिटेल सेक्टर की कंपनियां भविष्य में पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही हैं। बैंकिंग सेक्टर के फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं, लेकिन भू-राजनीतिक दबावों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सकारात्मक आउटलुक इन बाहरी दबावों से निपटने पर निर्भर करेगा, और अच्छी तरह से कैपिटलाइज्ड बैंक सबसे बेहतर स्थिति में होंगे।

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