त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने UPI पर मर्चेंट फीस (MDR) लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। अब दिवाली के बाद ही डिजिटल पेमेंट के नए स्ट्रक्चर पर कोई निर्णय लिया जाएगा, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है।
क्या है सरकार का फैसला?
भारत सरकार ने दिवाली के पीक सीजन को देखते हुए बड़े UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को टाल दिया है। इस फैसले के बाद, त्योहारों के दौरान डिजिटल भुगतान पहले की तरह पूरी तरह फ्री बना रहेगा। प्रपोज्ड फ्रेमवर्क के तहत, ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन और ₹1 लाख से ज्यादा मासिक रसीद पाने वाले व्यापारियों पर ही शुल्क लगाने की योजना थी। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर हमेशा की तरह फ्री रहेंगे।
क्यों है यह मुद्दा चर्चा में?
इस समय UPI इंफ्रास्ट्रक्चर का सालाना मेंटेनेंस खर्च लगभग ₹20,000 करोड़ के आसपास है। फिलहाल मर्चेंट से कोई चार्ज न लेने के कारण, इस पूरे नेटवर्क के अपग्रेड और सुरक्षा का बोझ पूरी तरह से बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर है।
भविष्य की चुनौतियां और ग्लोबल मॉडल
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना किसी रेवेन्यू मॉडल के इस सिस्टम को लंबे समय तक चलाना चुनौतीपूर्ण है। इससे कंपनियों की नई टेक्नोलॉजी और सिक्योरिटी लेयर्स में निवेश करने की क्षमता सीमित होती है। तुलना के लिए, ब्राजील के 'Pix' सिस्टम जैसे ग्लोबल मॉडल्स ने मेंटेनेंस के लिए ट्रांजैक्शन फीस का रास्ता अपनाया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि त्योहारों के बाद सरकार क्या कदम उठाती है और क्या कोई नया फंडिंग मैकेनिज्म तैयार किया जाता है, ताकि बैंकों और फिनटेक सर्विस प्रोवाइडर्स के मार्जिन पर दबाव न बढ़े।
