Q1 FY27 में भारत का क्रेडिट मार्केट दो अलग दिशाओं में बढ़ रहा है। जहां होम और गोल्ड लोन की वैल्यू में इजाफा हुआ है, वहीं बैंकों ने नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छोटे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन पर दांव लगाया है।
भारत का रिटेल क्रेडिट मार्केट फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। बैंकों और NBFCs की रणनीति साफ है—पोर्टफोलियो बढ़ाने के लिए बड़े लोन और नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए छोटे लोन।
बड़े लोन का दबदबा
भले ही नए लोन आवेदनों की संख्या कम हुई है, लेकिन लोन पोर्टफोलियो की वैल्यू तेजी से बढ़ रही है। होम लोन पोर्टफोलियो बढ़कर ₹45.5 लाख करोड़ हो गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 10.5% अधिक है। गोल्ड लोन के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं; यह 62.2% की उछाल के साथ ₹21.7 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि होम लोन की ओरिजिनेशन वॉल्यूम 17.3% और गोल्ड लोन की वॉल्यूम 25.6% तक गिरी है, जिसका मतलब है कि बैंक अब बड़े साइज के लोन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
कंज्यूमर ड्यूरेबल का 'डिजिटल गेटवे'
नए ग्राहकों को सिस्टम में लाने के लिए लेंडर्स 'कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन' का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तिमाही में पहली बार लोन लेने वाले कुल ग्राहकों में 45.5% हिस्सेदारी इन्हीं छोटे लोन की रही। करीब ₹22,303 के औसत लोन साइज के साथ, बैंक टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी पैठ बना रहे हैं। इसका मकसद ग्राहकों का क्रेडिट हिस्ट्री तैयार करना है ताकि भविष्य में उन्हें बड़े लोन बेचे जा सकें।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह तेजी कुछ जोखिम भी साथ लेकर आई है। बैंकों के पास डिपॉजिट ग्रोथ के मुकाबले क्रेडिट ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है, जिससे लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, ₹5 लाख से ₹35 लाख तक के अफोर्डेबल हाउसिंग लोन और ₹50,000 से ज्यादा के कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 'डेलिंक्वेंसी' (डिफॉल्ट) के संकेत दिख रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर भी दबाव बना हुआ है, इसलिए अगली तिमाही के नतीजों में एसेट क्वालिटी और मार्जिन की स्थिरता पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
