क्यों घट रही है क्रेडिट कार्ड की कमाई?
भारत के क्रेडिट कार्ड सेक्टर में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर बैंकों के मुनाफे पर पड़ रहा है। 'रिवॉल्वर' ग्राहक, जो हर महीने अपनी क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि का कुछ हिस्सा ही चुकाते हैं और बाकी पर इंटरेस्ट (Interest) देते हैं, उनकी संख्या में भारी गिरावट आई है। पेंडेमिक से पहले, रिवॉल्वर यूजर्स कुल ग्राहकों का 40% से 45% तक होते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 22% से 24% के बीच आ गई है। इसकी जगह 'ट्रांजैक्टर' ग्राहकों की संख्या बढ़ी है, जो हर महीने अपना पूरा बिल समय पर चुका देते हैं। इससे बैंकों का एक बड़ा इंटरेस्ट-आधारित रेवेन्यू (Revenue) का जरिया कम हो गया है।
SBI Cards में ही रिवॉल्वर रेट मार्च 2021 में 34% था, जो मार्च 2026 तक गिरकर 22% हो गया है। हालांकि, इस सबके बावजूद, क्रेडिट कार्ड मार्केट का कुल आकार बढ़ा है। 2021 से 2025 के बीच, क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन्स (Transactions) 2.6 गुना से ज़्यादा बढ़कर 570 करोड़ तक पहुंच गए, और 2025 में इनका कुल मूल्य ₹23.2 लाख करोड़ रहा। प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने दिसंबर 2025 तक मार्केट शेयर में अपनी पकड़ और मज़बूत की है, जो अब 71.1% हो चुका है। लेकिन, नए कार्ड जारी करने की ग्रोथ धीमी पड़ी है, जहां 2025-26 की दूसरी तिमाही में 28% की गिरावट देखी गई।
इंटरेस्ट इनकम से आगे की नई स्ट्रैटेजी
कम होते रिवॉल्वर ग्राहकों को देखते हुए, बैंक अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी में बदलाव कर रहे हैं। अब वे इंटरेस्ट इनकम के अलावा अन्य जरियों से कमाई बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बैंक इस स्ट्रक्चरल बदलाव को स्वीकार करते हुए कॉस्ट कंट्रोल (Cost Control), बेहतर रिवॉर्ड प्रोग्राम (Reward Programs) और ईएमआई (EMI) पोर्टफोलियो को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसमें UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल, जो अब 40% ट्रांजैक्शन्स का हिस्सा हैं, और RuPay कार्ड्स को बढ़ावा देना भी शामिल है।
ट्रांजैक्शन वॉल्यूम (Transaction Volume) और फी-आधारित आय (Fee-based Income) पर फोकस बढ़ता दिख रहा है। ग्राहकों का खर्च करने का तरीका भी बदल रहा है। अनुमान है कि 2030 तक घरों के बजट में नॉन-एसेंशियल (Non-essential) खर्चों का हिस्सा 43% से ज़्यादा हो जाएगा, जो बढ़ती आय और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर झुकाव से प्रेरित होगा। इससे रोजमर्रा के खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ेगा। फिनटेक कंपनियां भी अपनी भूमिका बढ़ा रही हैं, जो नवंबर 2025 तक करीब 15% नए क्रेडिट कार्ड इश्यू कर रही हैं। वे इनोवेटिव क्रेडिट सर्विसेज (Innovative Credit Services) और डेटा एनालिसिस (Data Analytics) के जरिए रिस्क असेसमेंट (Risk Assessment) कर रही हैं।
खतरे और रेगुलेटरी दबाव
हालांकि, बैंकों के सामने कई बड़े खतरे भी हैं। क्रेडिट कार्ड मार्केट में तेज़ ग्रोथ के कारण लोन क्वालिटी (Loan Quality) और ग्राहकों पर कर्ज के बोझ को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) में वृद्धि हुई है, जिसके कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने क्रेडिट कार्ड जैसे अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loans) पर रिस्क वेट्स (Risk Weights) को 150% तक बढ़ा दिया है। इससे ग्रोथ सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। नए कार्ड इश्यूएंस (Card Issuances) की ग्रोथ जो पहले 20% से ज़्यादा थी, अगस्त 2025 तक गिरकर करीब 4% रह गई।
इसके अलावा, आकर्षक रिवॉर्ड प्रोग्राम्स (Reward Programs) की लागत भी बढ़ रही है। ICICI Bank जैसे बैंक कैशबैक, लाउंज एक्सेस (Lounge Access) और रिवॉर्ड पॉइंट्स (Reward Points) जैसी सुविधाओं में कटौती कर रहे हैं, क्योंकि ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Costs), देर से पेमेंट और खर्च में धीमी ग्रोथ बढ़ गई है। क्रेडिट कार्ड पर एवरेज इंटरेस्ट रेट (Average Interest Rate) अभी भी 30% से 48% के बीच बना हुआ है, और अमेरिका जैसे देशों की तरह कोई रेट कैप (Rate Cap) लागू होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। यह खासकर SBI Cards जैसी स्पेशलाइज्ड क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण परिदृश्य प्रस्तुत करता है।