साल-दर-साल ग्रोथ धीमी, पर महीने-दर-महीने उछाल जारी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर महीने में क्रेडिट कार्ड से होने वाले खर्च की साल-दर-साल (Year-on-Year) ग्रोथ घटकर 8.9% रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि में देखे गए लगभग 14% की रफ़्तार से काफी कम है। इस दौरान कुल क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2.05 लाख करोड़ रहा। यह गिरावट ग्रोथ रेट में सामान्यीकरण का संकेत देती है। हालांकि, यह सालाना मंदी महीने-दर-महीने (Month-on-Month) के मजबूत प्रदर्शन से बिल्कुल अलग है। नवंबर के मुकाबले खर्च में 8.4% की भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस बढ़ोतरी की वजह साल के अंत में लोगों का बढ़ा-चढ़ाकर किया गया खर्च, ई-कॉमर्स की लगातार डिमांड और छुट्टियों के मौसम में बढ़ा हुआ ट्रैवल खर्च बताया जा रहा है। प्रति कार्ड खर्च में भी 8% की बढ़ोतरी हुई, जो फेस्टिव सीजन में हर कस्टमर द्वारा औसतन अधिक खर्च करने का इशारा करता है।
RBI की पैनी नजर और अनसिक्योर्ड लोन का खतरा
क्रेडिट कार्ड खर्च में सालाना ग्रोथ की यह नरमी और महीने-दर-महीने बढ़ोतरी के बीच का यह अंतर, कंज्यूमर क्रेडिट में एक संभावित बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। यह सब तब हो रहा है जब RBI अनसिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो पर अपनी पैनी नजर रखे हुए है, जो बड़े बैंकों में डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा रहे हैं। हालांकि कुल क्रेडिट कार्ड खर्च बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले लाए गए टाइट रेगुलेटरी नियमों का असर हो सकता है। अनसिक्योर्ड लोन, यानी ऐसे लोन जिनमें कोई गारंटी नहीं ली जाती, पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं। यह बैंकों के कुल लोन का 24.5% तक पहुंच गया है, जो 2005 में केवल 17.7% था। RBI इस सेगमेंट में संभावित क्रेडिट रिस्क को लेकर चिंतित है और उसने इस पर सख्ती के संकेत दिए हैं।
मार्केट शेयर में बड़ा बदलाव: सरकारी बैंकों की बढ़त
मार्केट डायनामिक्स में भी एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। क्रेडिट कार्ड खर्च के मामले में सरकारी बैंक (Public Sector Banks - PSBs) धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं और प्राइवेट बैंक पीछे छूट रहे हैं। दिसंबर में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी क्रेडिट कार्ड खर्च में बढ़कर 22.2% हो गई, जो पिछले साल 17.7% थी। वहीं, प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी घटकर 72.5% रह गई। इस बदलाव से पता चलता है कि बैंकिंग सेक्टर में कॉम्पिटिटिव स्ट्रेटेजी और रिस्क लेने की क्षमता में इजाफा हो रहा है।
कॉम्पिटिटिव परिदृश्य और प्रमुख खिलाड़ी
अगर प्रमुख खिलाड़ियों की बात करें, तो HDFC बैंक अभी भी कार्ड इश्यू करने और कुल खर्च के मामले में सबसे आगे है, जिसकी मार्केट शेयर लगभग 22% है। इसके बाद SBI Card 19% शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। ICICI बैंक और Axis बैंक क्रमशः लगभग 16% और 14% की हिस्सेदारी रखते हैं। कुल मिलाकर, प्राइवेट बैंक अभी भी मार्केट का बड़ा हिस्सा, करीब 71%, नियंत्रित करते हैं। वहीं, सरकारी बैंकों का दबदबा बढ़ रहा है। दिसंबर तक कुल आउटस्टैंडिंग क्रेडिट कार्ड की संख्या बढ़कर 11.6 करोड़ हो गई है, जो कार्ड पेनिट्रेशन में लगातार बढ़ोतरी दिखाती है।
अनसिक्योर्ड लोन का खतरा और भविष्य का रास्ता
अनसिक्योर्ड लोन पर RBI की बढ़ती पैनी नजर क्रेडिट कार्ड सेक्टर के लिए एक बड़ा रिस्क पैदा करती है। क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग (AUM) सितंबर 2025 तक 9% बढ़कर ₹3.4 लाख करोड़ हो गया है, लेकिन RBI ने इसमें संभावित क्रेडिट रिस्क जमा होने की चेतावनी दी है। कुछ बैंकों जैसे ICICI बैंक ने Q2 2024 में क्रेडिट कार्ड लोन में 28% की ग्रोथ दर्ज की, जबकि Kotak Mahindra Bank ने 15% की ग्रोथ दिखाई। मार्केट में कंसंट्रेशन भी अधिक है, टॉप 5-8 प्लेयर्स 80% से ज्यादा खर्च को कंट्रोल करते हैं। हालांकि, क्रेडिट कार्ड में अर्ली डेलिंक्वेंसी (Early Delinquencies) कम हो रही है, लेकिन सही अंडरराइटिंग (Underwriting) अब बहुत जरूरी हो गई है। डिजिटल ट्रांजेक्शन क्रेडिट कार्ड का मुख्य जरिया बने हुए हैं, जो कुल ट्रांजेक्शन का 61% है। भविष्य में, क्रेडिट कार्ड मार्केट में ग्रोथ तो जारी रहेगी, लेकिन एक सामान्य रफ्तार से। RBI की अनसिक्योर्ड लोन पर नजर रखने की वजह से भविष्य में अंडरराइटिंग और एसेट क्वालिटी पर ज्यादा फोकस रहेगा।