जुलाई 2026 में भारत में क्रेडिट कार्ड की संख्या बढ़कर **122.86 मिलियन** हो गई है। HDFC और SBI जैसे दिग्गज बैंकों के बीच, IDFC First Bank और Federal Bank जैसे मिड-साइज बैंक तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।
भारत का क्रेडिट कार्ड बाजार लगातार अपनी रफ्तार पकड़ रहा है। जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल कार्ड्स की संख्या 122.86 मिलियन पर पहुंच गई है। केवल एक महीने में 1.26 मिलियन नए कार्ड जारी किए गए, जो पिछले महीने की तुलना में 11.5% की बढ़त है। कार्ड से होने वाला कुल खर्च लगातार तीसरे महीने ₹2 लाख करोड़ के स्तर को पार करते हुए ₹2.08 लाख करोड़ पर पहुंच गया है।
बाजार का बदलता समीकरण
मार्केट पर अब भी बड़े बैंकों का कब्जा है, जिसमें HDFC Bank की हिस्सेदारी 22%, SBI Card की 19%, ICICI Bank की 16% और Axis Bank की 13% है। लेकिन, अब कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। IDFC First Bank और Federal Bank जैसे मिड-साइज बैंक नए ग्राहकों को जोड़ने में बड़ी सफलता हासिल कर रहे हैं, जिससे बाजार का हिस्सा अब छोटे खिलाड़ियों की ओर शिफ्ट हो रहा है।
छोटे खर्चों का बढ़ता ट्रेंड
दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 24.5% का उछाल आया है, लेकिन प्रति ट्रांजैक्शन औसत खर्च (Average Spend) 14% कम हो गया है। इसका मतलब है कि लोग अब महंगे सामान के बजाय रोजमर्रा के छोटे-मोटे खर्चों के लिए कार्ड का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। बैंकों के लिए यह बदलाव रेवेन्यू मॉडल के लिहाज से काफी अहम है।
रिस्क और सावधानी
क्रेडिट कार्ड एक 'अनसिक्योर्ड क्रेडिट' है, यानी इसमें कोई गारंटी या कोलैटरल नहीं होता। ऐसे में बैंकों को अपनी अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स पर कड़ी नजर रखनी होगी। प्रतिस्पर्धा के दौर में अगर बैंकों ने मार्केट शेयर बढ़ाने के चक्कर में कर्ज देने के नियम ढीले किए, तो भविष्य में एसेट क्वालिटी खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है। आने वाले त्योहारी सीजन में यह देखना अहम होगा कि बैंक अपने क्रेडिट मैनेजमेंट को कैसे संभालते हैं।
