बजट में क्या रहा खास और क्या छूटा?
Union Budget 2026-27, जिसे 1 फरवरी को पेश किया गया, में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए सीधे क्रेडिट गारंटी (Credit Guarantee) की सुविधा शामिल नहीं की गई, जिसकी उद्योग जगत लंबे समय से मांग कर रहा था। इसके अभाव में, खास तौर पर छोटे NBFC-MFIs को बैंकों से आसान फंडिंग (Funding) मिलने में कुछ चुनौतियां बनी रह सकती हैं। लेकिन, बजट के राजकोषीय (Fiscal) उपायों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। मत्स्य पालन (Fisheries), पशुपालन (Animal Husbandry) और हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड प्रोग्राम्स (Credit-linked Programs) पर जोर दिया जाएगा। इन कदमों का मकसद ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोतों में विविधता लाना है, जिससे सेक्टर के मुख्य ग्राहक आधार की लोन चुकाने की क्षमता (Repayment Capacity) बढ़ेगी। इसके अलावा, ₹10,000 करोड़ के MSME ग्रोथ फंड और ₹12.2 लाख करोड़ के कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) का भी ऐलान हुआ है।
क्रेडिट सपोर्ट पर एक और तस्वीर
भले ही बजट भाषण में क्रेडिट गारंटी का सीधा जिक्र नहीं था, लेकिन माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को सरकारी समर्थन का एक और रास्ता मिला है। एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (Expenditure Finance Committee) ने माइक्रो-लेंडर्स (Micro-lenders) के लिए ₹8,000 करोड़ की एक क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दी है। यह स्कीम बैंकों को कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित करेगी, खासकर छोटे MFIs को जो फंडिंग के दबाव का सामना कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पहल यूनियन बजट के दायरे से बाहर लागू की जाएगी, यानी यह 1 फरवरी के बजट के ऐलान का हिस्सा नहीं थी। यह अलग से आई स्कीम सेक्टर में बनी हुई एसेट क्वालिटी (Asset Quality) की चुनौतियों और फंडिंग की तंगी के बीच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच (Safety Net) प्रदान करती है।
सेक्टर का नज़रिया: मिली-जुली उम्मीदें
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए आगे का रास्ता कुछ मिला-जुला दिख रहा है। हालांकि, कुछ कंपनियों के लिए एसेट क्वालिटी (Asset Quality) की लगातार बनी हुई चुनौतियां प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और ग्रोथ की उम्मीदों को थोड़ा कम कर सकती हैं। लेकिन, कुछ इंडिकेटर्स (Indicators) रिकवरी की ओर इशारा कर रहे हैं। ICRA के एनालिसिस के अनुसार, FY2025 और Q1 FY2026 में एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में गिरावट के बाद, FY2026 में 8-12% की ग्रोथ की उम्मीद है। India Ratings ने सेक्टर के आउटलुक को 'खराब' (Deteriorating) से 'तटस्थ' (Neutral) कर दिया है, और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार की उम्मीद जताई है। यह सतर्क आशावाद (Cautious Optimism) इंडस्ट्री लीडर्स में भी दिख रहा है, जो कलेक्शन (Collections) में सुधार और विलंबित भुगतान (delinquencies) में कमी की बात कर रहे हैं।
मुथूट माइक्रोफिन का स्टैंड
Muthoot Microfin, जो FY23 के अंत तक ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी NBFC-MFI है, करीब ₹2,942 करोड़ से ₹3,046 करोड़ के मार्केट कैप (Market Cap) के साथ काम कर रही है। कंपनी का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग -8.4x है, जो वर्तमान कमाई की स्थिति को दर्शाता है। फरवरी 2026 की शुरुआत में स्टॉक ₹170-₹180 की रेंज में ट्रेड कर रहा था। कंपनी के CEO, Sadaf Sayeed, का मानना है कि बजट के ग्रामीण विकास वाले कदम Muthoot Microfin के मुख्य मिशन, यानी उद्यमों का निर्माण और चुकाने की क्षमता बढ़ाना, के अनुरूप हैं। यह सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत भी देता है। कंपनी फंडिंग के विविधीकरण (Diversification) के लिए बॉन्ड मार्केट (Bond Market) पर अपनी निर्भरता रणनीतिक रूप से बढ़ा रही है।
रेगुलेटरी माहौल और भविष्य
सेक्टर के लिए सेल्फ-रेगुलेटर (Self-Regulator) Sa-Dhan के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO, Jiji Mammen, ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य माइक्रोफाइनेंस की ग्रोथ और लोन रिकवरी (Loan Recovery) के लिए कितना महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब 80% ऑपरेशन ग्रामीण इलाकों में होते हैं। सेक्टर एक बदलते रेगुलेटरी माहौल (Regulatory Environment) का सामना कर रहा है, जिसमें ग्राहकों पर ज्यादा कर्ज चढ़ने से रोकने के लिए नए नियम (Guardrails) लागू किए गए हैं। आने वाले वित्तीय वर्ष (Financial Year) में सेक्टर के प्रदर्शन के लिए बजट की ग्रामीण विकास पहलों की प्रभावशीलता एक महत्वपूर्ण पैमाना होगी।