India Budget 2026: बॉन्ड मार्केट पर ₹30 लाख करोड़ की सप्लाई का दबाव! RBI संभालेगा बाज़ी?

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Budget 2026: बॉन्ड मार्केट पर ₹30 लाख करोड़ की सप्लाई का दबाव! RBI संभालेगा बाज़ी?
Overview

भारत सरकार ने यूनियन बजट 2026 में अपनी फिस्कल पॉलिसी का मुख्य एंकर (Fiscal Anchor) बदलकर डेट-टू-जीडीपी रेशियो कर दिया है, जिसका लक्ष्य FY31 तक इसे **50%** तक लाना है। वहीं, FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट **4.3%** रहने का अनुमान है। लेकिन, सबसे बड़ी खबर बॉन्ड मार्केट के लिए है, जहाँ केंद्र और राज्य सरकारों की मिलाकर **₹30.2 ट्रिलियन** (₹30.2 लाख करोड़) की रिकॉर्ड बॉन्ड सप्लाई आने वाली है।

फिस्कल एंकर में बड़ा बदलाव और रिकॉर्ड कर्ज़ का दबाव

यूनियन बजट 2026 में 1 फरवरी 2026 को एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है। अब सरकार का मुख्य फोकस डेफिसिट-टू-जीडीपी रेशियो के बजाय डेट-टू-जीडीपी रेशियो पर रहेगा। इस नए फिस्कल एंकर का दीर्घकालिक लक्ष्य FY31 तक इस रेशियो को 50% पर लाना है। इसका उद्देश्य लंबी अवधि में सरकारी कर्ज़ (Debt) को कंट्रोल करना और फिस्कल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाना है। हालांकि, इस कंसॉलिडेशन पर फोकस के बावजूद, FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट का अनुमान 4.3% रखा गया है, जो FY26 के रिवाइज्ड 4.4% से मामूली कमी है।

लेकिन, इस फिस्कल मैनेजमेंट के बीच बॉन्ड मार्केट पर भारी दबाव आने वाला है। सरकार FY27 के लिए ₹17.2 ट्रिलियन की गवर्नमेंट सिक्योरिटीज इश्यू करने की योजना बना रही है, जो पिछले सालों की तुलना में काफी ज़्यादा है। इसमें राज्यों का योगदान भी बड़ा रहेगा, जिनकी अपनी बॉन्ड सप्लाई ₹13 ट्रिलियन के आसपास रहने का अनुमान है। इस तरह, केंद्र और राज्य सरकारों से कुल मिलाकर ₹30.2 ट्रिलियन (₹30.2 लाख करोड़) की रिकॉर्ड बॉन्ड सप्लाई आने की उम्मीद है, जिसने अभी से डेट मार्केट में चिंता बढ़ा दी है।

इनवेस्टर्स की डिमांड में नरमी और RBI की भूमिका

बॉन्ड सप्लाई में इस भारी बढ़ोत्तरी का सामना तब करना पड़ रहा है जब इनवेस्टर्स की डिमांड में नरमी के संकेत दिख रहे हैं। बैंक, जो पारंपरिक रूप से सरकारी बॉन्ड के सबसे बड़े खरीदार होते हैं, अब काफी दबाव में हैं। बैंकों का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो दिसंबर 2025 तक रिकॉर्ड 82% पर पहुँच गया है। इसका मतलब है कि बैंक अपनी जमा राशि का बड़ा हिस्सा लोन के रूप में दे चुके हैं, जिससे उनके पास नई सिक्योरिटीज में निवेश के लिए कम पैसा बच रहा है। दिसंबर 2025 तक बैंकों का गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इन्वेस्टमेंट घटकर 27.7% रह गया है, जो दिसंबर 2024 के 29.0% से कम है।

इस दबाव को देखते हुए, डोमेस्टिक सेविंग्स के अलावा फॉरेन कैपिटल को आकर्षित करना और नए डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट के रास्ते खोजना ज़रूरी होगा। इस स्थिति में, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पर मार्केट को संभालने और लिक्विडिटी को मैनेज करने का ज़िम्मा बढ़ेगा। RBI अपनी ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMOs) के ज़रिए मार्केट में पैसा डालकर यील्ड्स (Yields) को स्थिर रखने की कोशिश करेगा। बजट से पहले ही यील्ड्स 6.72% के मल्टी-मंथ हाई के करीब पहुँच गई थीं।

आगे का रास्ता: सप्लाई का बड़ा चैलेंज

आने वाले समय में भारतीय बॉन्ड मार्केट के लिए सप्लाई का दबाव एक बड़ी चुनौती रहने वाला है। रिकॉर्ड मात्रा में गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को अवशोषित करने के लिए पॉलीसी मेकर्स और इनवेस्टर्स दोनों को सावधानी से आगे बढ़ना होगा। डेट-टू-जीडीपी रेशियो का नया एंकर भले ही लंबी अवधि के लिए फिस्कल हेल्थ का फ्रेमवर्क दे, लेकिन तत्काल भविष्य में मार्केट को इस भारी सप्लाई से निपटना होगा। इसका असर कॉर्पोरेट बॉरोइंग से लेकर कंज्यूमर लोन तक, अर्थव्यवस्था के उधार लेने की लागत पर देखा जा सकता है।

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