देश में पड़ रही जानलेवा गर्मी का असर अब बैंकों के लोन कलेक्शन (Loan Collection) पर भी दिखने लगा है। ऐसे में, भारतीय बैंक अपने कलेक्शन ऑपरेशन्स को सुचारू रखने और ग्राहकों तक पहुंच बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं।
अप्रैल से जून 2026 तक और भीषण गर्मी पड़ने की आशंका के बीच, बैंक खासकर माइक्रोफाइनेंस और गोल्ड लोन जैसे क्षेत्रों में दिक्कतें देख रहे हैं, जो फील्ड वर्क पर बहुत निर्भर करते हैं। बैंकों को उम्मीद है कि गर्मी की वजह से फील्ड वर्क में आ रही मुश्किलों के कारण कलेक्शन की एफिशिएंसी (Efficiency) में करीब 2% की गिरावट आ सकती है। यह स्थिति पिछले साल भी देखी गई थी, जब एफिशिएंसी में 50-200 बेसिस पॉइंट की कमी आई थी।
इस चुनौती से निपटने के लिए, Piramal Finance जैसी कंपनियां अपने AI टूल्स को अपग्रेड कर रही हैं। ये AI टूल्स ग्राहकों की पहचान करने में मदद करते हैं कि कौन डिजिटल पेमेंट करने की सबसे ज्यादा संभावना रखता है। साथ ही, यह उनके संपर्क करने का सबसे अच्छा समय बताते हैं और फील्ड स्टाफ को मुश्किल मामलों से निपटने के लिए गाइड करते हैं। इस तरीके से, न सिर्फ ऑपरेशन्स सुचारू रहते हैं, बल्कि गर्मी में बाहर ज्यादा समय बिताने से कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
बैंक तेजी से और बेहतर कस्टमर सर्विस के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं, इसे कॉम्पिटिटिव बने रहने की कुंजी मान रहे हैं। यह दिखाता है कि वे क्लाइमेट इवेंट्स से होने वाले व्यवधानों को मैनेज करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं। भारत में लेंडिंग का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि संस्थान डिजिटल टूल्स को क्लाइमेट रिस्क मैनेजमेंट की स्ट्रैटेजी के साथ कितनी अच्छी तरह जोड़ पाते हैं।
