साल के अंत में बैंकों की तूफानी तेजी, पर डिपॉजिट ग्रोथ पर सवालिया निशान | Nomura की राय

BANKINGFINANCE
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
साल के अंत में बैंकों की तूफानी तेजी, पर डिपॉजिट ग्रोथ पर सवालिया निशान | Nomura की राय
Overview

भारतीय बैंकों ने बीती तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिससे HDFC Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, IndusInd Bank, IDFC First Bank और Bank of Baroda जैसे प्रमुख बैंकों पर ब्रोकरेज फर्म Nomura ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। लेकिन, साल के अंत में डिपॉजिट्स में आई अप्रत्याशित तेजी पर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या यह ग्रोथ लंबी अवधि के लिए टिकाऊ है या सिर्फ एक अस्थायी उछाल है।

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Nomura की 'Buy' रेटिंग बरकरार, पर डिपॉजिट ग्रोथ पर चिंता?

भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत मजबूत नतीजों के साथ की है। इस बीच, ब्रोकरेज फर्म Nomura ने HDFC Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, IndusInd Bank, IDFC First Bank और Bank of Baroda जैसे बड़े बैंकों पर अपना 'Buy' रेटिंग बरकरार रखा है। हालांकि, Nomura ने इस ओर भी इशारा किया है कि जिस तरह से तिमाही के आखिर में डिपॉजिट्स में जबरदस्त उछाल देखा गया, वह लंबी अवधि की स्थिर ग्रोथ का संकेत नहीं है। यह बढ़ोतरी अक्सर साल के अंत में एक खास जोर लगाने का नतीजा होती है।

किन बैंकों पर Nomura का भरोसा?

Nomura की लिस्ट में HDFC Bank शामिल है, जिसकी लोन ग्रोथ 12% सालाना रही, जो इंडस्ट्री औसत से थोड़ी कम है। लेकिन, तिमाही के अंत में डिपॉजिट्स में हुई भारी बढ़ोतरी, जिसमें CASA (करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट) 10.4% और टर्म डिपॉजिट 7.7% बढ़े, ने बैंक के बैलेंस शीट को मजबूत किया। इससे बैंक का लोन-टू-डिपॉजिट (LDR) रेश्यो 95.3% पर आ गया। हालांकि, औसत डिपॉजिट ग्रोथ में उतनी तेजी नहीं दिखी, जो सेक्टर की चिंता को बढ़ाती है।

Axis Bank पर भी Nomura का भरोसा कायम है। बैंक की लोन ग्रोथ 18.4% सालाना रही, जो इंडस्ट्री से तेज है, और डिपॉजिट 13.9% बढ़ा। तिमाही-दर-तिमाही लोन ग्रोथ 6.3% अच्छी रही। बैंक का CASA रेशियो बढ़कर 39.6% हो गया, और P/E रेश्यो 13-16x के आसपास है।

Kotak Mahindra Bank को भी 'Buy' रेटिंग मिली है। इसकी लोन ग्रोथ 16.2% सालाना रही, जो कुछ प्रतिद्वंद्वियों से थोड़ी धीमी है। डिपॉजिट ग्रोथ 14.7% रही, और CASA रेशियो 43.3% पर सुधर गया। Nomura ने नोट किया कि अंत-अवधि की CASA में उछाल दिखा, जो सेक्टर के लिए आम है। इसका P/E रेश्यो 19-31x है।

IndusInd Bank की लोन बुक 8.7% सालाना घटी है, लेकिन गिरावट की रफ्तार धीमी हुई है। डिपॉजिट ग्रोथ तिमाही-दर-तिमाही 1.6% रही, जो रिटेल डिपॉजिट्स के कारण बढ़ी। CASA रेशियो 31.3% पर पहुंचा। इस बैंक के P/E रेश्यो में काफी भिन्नता देखी गई है; कुछ रिपोर्ट्स में यह लॉस (घाटे) में दिख रहा है तो कहीं 16-20x तक। Nomura की 'Buy' रेटिंग के बावजूद, यह एक चिंता का विषय है।

IDFC First Bank की 20% सालाना लोन ग्रोथ के बूते इसे 'Buy' रेटिंग मिली है। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ तिमाही-दर-तिमाही फ्लैट रही। फिर भी, Nomura ने बैंक की एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग बेस की सराहना की है। इसका P/E रेश्यो 30-33x है।

Bank of Baroda को भी 'Buy' रेटिंग मिली है, जिसकी लोन ग्रोथ 16.2% सालाना और डिपॉजिट ग्रोथ 12.0% सालाना रही। यह बैंक 6-7x के P/E रेश्यो के साथ काफी किफायती वैल्यूएशन पर है।

डिपॉजिट ग्रोथ के आंकड़े और चिंताएं

Moody's Ratings के अनुसार, भारतीय बैंकिंग सिस्टम मजबूत आर्थिक ग्रोथ और स्थिर एसेट क्वालिटी के दम पर आगे बढ़ रहा है। FY27 में सिस्टम-वाइड लोन ग्रोथ 11-13% रहने का अनुमान है। लेकिन, एक बड़ी चिंता यह है कि डिपॉजिट्स की ग्रोथ लोन की तुलना में उतनी तेज नहीं है, जिससे सिस्टम-वाइड लोन-टू-डिपॉजिट रेश्यो लगभग 83% तक पहुंच गया है। यह फंड की कमी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को निचोड़ सकती है, खासकर बड़े बैंकों के लिए जिन्हें ज्यादा डिपॉजिट लागत वहन करनी पड़ती है। RBI द्वारा 5.25% पर रेपो रेट स्थिर रखने का फैसला, फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स में बड़ी बढ़ोतरी की गुंजाइश कम करता है, जिससे फंड के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ने पर मार्जिन पर और दबाव आ सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, मजबूत साल-अंत की डिपॉजिट इनफ्लो के बाद अक्सर धीमी ग्रोथ देखी गई है, अगर बैंकों के ग्राहक अधिग्रहण और रिटेंशन के प्रयास मजबूत न हों। वर्तमान स्थिति भी कुछ ऐसी ही लग रही है, जहां बैंकों ने अंत-अवधि के आंकड़े बढ़ाने के लिए शॉर्ट-टर्म फंडिंग का इस्तेमाल किया हो।

डिपॉजिट ग्रोथ की स्थिरता पर जोखिम

सबसे बड़ा जोखिम यह है कि क्या रिपोर्ट की गई डिपॉजिट ग्रोथ टिक पाएगी। अगर यह सिर्फ साल के अंत का एक अस्थायी उछाल था, तो बैंकों को लगातार ऊंची फंडिंग लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन सिकुड़ सकते हैं। यह IndusInd Bank जैसी कंपनियों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां हालिया रिपोर्टों में P/E रेश्यो 'घाटे में' (At Loss) दिखाया गया है, जो Profitability संबंधी समस्याओं या निवेशक के संदेह का संकेत देता है, भले ही Nomura की 'Buy' रेटिंग हो। लोन की तुलना में डिपॉजिट ग्रोथ का लगातार पिछड़ना, LDR को 83% की ओर ले जाना, सावधानीपूर्वक निगरानी की मांग करता है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो बैंकों को महंगी होलसेल फंडिंग या डिपॉजिट रेट्स को तेजी से बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर Profit पर पड़ेगा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक संघर्ष MSMEs के लिए लोन डिफॉल्ट बढ़ा सकता है। विभिन्न P/E वैल्यूएशन्स, Bank of Baroda (~6.2x) जैसे वैल्यू स्टॉक से लेकर IDFC First Bank (~30x) जैसे ग्रोथ-उन्मुख बैंकों तक, जोखिम और ग्रोथ की स्थिरता पर निवेशकों के अलग-अलग विचारों को दर्शाते हैं।

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