ग्लोबल टेंशन का बैंकिंग सेक्टर पर असर
मिडिल ईस्ट में गहराता जा रहा भू-राजनीतिक संकट भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी चिंता का सबब बन गया है। इस तनाव ने सप्लाई में रुकावटों और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं को हवा दी है। इसी के साथ, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को डरा दिया।
रिकॉर्ड FPI आउटफ्लो से मचा हड़कंप
इन चिंताओं के चलते मार्च महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटीज़ से रिकॉर्ड $12.58 बिलियन की बिकवाली की। यह किसी एक महीने में हुई सबसे बड़ी निकासी है, जो फरवरी में देखी गई रिकवरी के उलट है। इस लगातार बिकवाली के दबाव ने बाजार में व्यापक निवेशक निकासी का संकेत दिया है। इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर जटिल है, जिसमें आयात लागत बढ़ने, व्यापार घाटा बढ़ने और महंगाई के कारण ब्याज दरों में कटौती में देरी होने की आशंका शामिल है।
SBI ने ICICI को पछाड़ा, पर सेक्टर पर दबाव जारी
इस बीच, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जनवरी-मार्च तिमाही में मार्केट कैप के हिसाब से भारत का दूसरा सबसे बड़ा लेंडर बन गया है, जिसने ICICI Bank को पीछे छोड़ दिया है। SBI का मार्केट वैल्यू करीब ₹9.04 ट्रिलियन रहा, जिसमें केवल 0.3% की मामूली गिरावट आई, जबकि ICICI Bank में 10% से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों को उम्मीद है कि मार्च तिमाही के लिए SBI के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) ICICI Bank जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक मजबूत रहेंगे। इसके बावजूद, टॉप 20 लिस्टेड बैंकों में से 18 बैंकों का मार्केट कैप इसी तिमाही में सिकुड़ गया।
HDFC Bank का जलवा, पर चुनौतियां भी
HDFC Bank भारत का सबसे मूल्यवान लेंडर बना हुआ है। तिमाही के अंत में बैंक का वैल्यूएशन करीब ₹11.26 ट्रिलियन था, भले ही इसका मार्केट कैप 26.1% सिकुड़ गया हो। बैंक को अपने पार्ट-टाइम चेयरमैन के नैतिक चिंताओं पर इस्तीफे के बाद चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन मुद्दों के बावजूद, Macquarie Capital ने 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बनाए रखी और बैंक के मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ और कम लोन-टू-डिपॉजिट रेश्यो को सकारात्मक कारक बताया। हालांकि, हालिया विश्लेषक भावना अधिक सतर्क है, जिसमें वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों ने 'रिड्यूस' रेटिंग का सुझाव दिया है, जो पॉलिसी हेडविंड्स और फॉरेन एक्सचेंज प्रतिबंधों से संभावित नियामक प्रभावों की ओर इशारा करते हैं।
अन्य प्रमुख बैंकों में भी भारी गिरावट
अन्य कई बैंकों के मार्केट वैल्यू में भी काफी गिरावट देखी गई। IDBI Bank ने मार्केट वैल्यू का 40.3% खो दिया, जबकि IDFC First Bank में 31.2% की गिरावट आई। भारतीय बैंकिंग सेक्टर के कुल मार्केट वैल्यू पर इस दबाव को देखा गया, जो ग्लोबल ट्रेंड के समानांतर है। P/E रेश्यो इन वैल्यूएशन एडजस्टमेंट्स को दर्शाते हैं: SBI 11.20 पर, ICICI Bank 16.63 पर, HDFC Bank करीब 15.83 पर, IDBI Bank 8.05 पर, और IDFC First Bank 33.43 पर है।
आगे क्या? NIMs और नतीजों पर नजर
विश्लेषकों को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव जारी रहेगा, और डिपॉजिट री-प्राइसिंग के पूरी तरह प्रभावी होने के बाद दूसरी छमाही में सुधार की उम्मीद है। बैंकिंग सेक्टर के लिए कुल आय वृद्धि (earnings growth) FY26 में धीमी रहने का अनुमान है, जिसके बाद FY27 में मजबूत वापसी होगी, जो अधिक अनुकूल ब्याज दर की स्थिति और ऋण की मांग पर निर्भर करेगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ सकती है, जिससे RBI ब्याज दरों में कटौती में देरी कर सकता है, जो ऋण वृद्धि और खर्च को प्रभावित करेगा।