एसेट क्वालिटी में सुधार, NPA हुआ कम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के बैंकों की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में काफी सुधार देखा गया है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) दिसंबर 2025 तक घटकर 2% पर आ गया है, जो पिछले साल 2.5% था। यह सुधार रिटेल लोन (Retail Loans), सर्विसेज (Services), इंडस्ट्री (Industry) और एग्रीकल्चर (Agriculture) जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में देखा गया है।
क्रेडिट ग्रोथ में आई तेजी
दूसरी ओर, बैंकों से लोन की मांग (Credit Demand) भी तेजी से बढ़ी है। मार्च 2026 तक बैंकों का क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) 13.8% तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 11.0% था। फॉरेन बैंक (Foreign Banks) इस ग्रोथ में सबसे आगे रहे, लेकिन पब्लिक सेक्टर बैंक (Public Sector Banks) और प्राइवेट बैंक (Private Banks) भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहे। इससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था में अच्छी हलचल है और कंपनियां व आम लोग ज्यादा लोन ले रहे हैं।
RBI की चिंता: सिस्टमैटिक रिस्क नहीं, पर स्थानीय जोखिम मौजूद
इस मजबूत तस्वीर के बावजूद, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वैश्विक सप्लाई चेन (Supply Chain) की दिक्कतों या अन्य वैश्विक अनिश्चितताओं से बैंकिंग सिस्टम की लाभप्रदता (Profitability) या वित्तीय सेहत पर कोई बड़ा सिस्टमैटिक खतरा नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ विशेष क्षेत्र (Sectors) या पॉकेट्स (Pockets) स्थानीय स्तर पर प्रभावित हो सकते हैं। इस बढ़ती क्रेडिट मांग को पूरा करने के लिए, बैंकों ने अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो (Investment Portfolios), खासकर एसएलआर सिक्योरिटीज (SLR Securities) में अपनी होल्डिंग कम की है, ताकि ज्यादा पैसा लोन देने में लगाया जा सके।
तेजी से बढ़ते क्रेडिट पर नजर
विश्लेषकों का मानना है कि 13.8% की यह क्रेडिट ग्रोथ कई उभरते बाजारों (Emerging Markets) की तुलना में काफी तेज है। हालांकि, इस तेज रफ्तार के कुछ जोखिम भी हैं। अगर इस क्रेडिट ग्रोथ को ठीक से मैनेज न किया गया, तो भविष्य में एनपीए (NPA) के दोबारा बढ़ने का खतरा हो सकता है, खासकर तब जब वैश्विक ब्याज दरें ऊंची हों और मंदी का डर बना रहे। इसके अलावा, भारतीय कॉरपोरेट और घरेलू कर्ज (Leverage) का स्तर भी एक चिंता का विषय बना हुआ है। एसएलआर सिक्योरिटीज (SLR Securities) में निवेश घटाने से बैंकों के पास लिक्विडिटी (Liquidity) का बफर कम हो गया है, जो तनाव के समय में मुश्किल पैदा कर सकता है।
आगे का रास्ता: सतर्कता के साथ उम्मीद
कुल मिलाकर, भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए आउटलुक (Outlook) सतर्कता के साथ उम्मीद भरा है। घरेलू आर्थिक गतिविधि से क्रेडिट ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक उथल-पुथल और महंगाई पर नजर रखनी होगी। RBI की नजरें संभावित तनाव बिंदुओं पर बनी रहेंगी, जो इन जटिलताओं से निपटने में महत्वपूर्ण होंगी।
