Banking Liquidity: बैंकिंग सिस्टम में नकदी का सैलाब, सरप्लस ₹6.65 लाख करोड़ के पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Banking Liquidity: बैंकिंग सिस्टम में नकदी का सैलाब, सरप्लस ₹6.65 लाख करोड़ के पार

भारतीय बैंकिंग सिस्टम में भारी लिक्विडिटी सरप्लस दर्ज किया गया है। FCNR(B) स्वैप विंडो बंद होने के बाद नकदी का स्तर **₹6.65 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो अप्रैल 2022 के बाद सबसे अधिक है।

लिक्विडिटी का नया रिकॉर्ड

31 अगस्त, 2026 तक भारतीय बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस ₹6.65 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। यह 19 अप्रैल, 2022 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस अचानक आई नकदी की मुख्य वजह फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR(B)) स्वैप विंडो की मैच्योरिटी और उसका बंद होना है, जिससे सिस्टम में विदेशी मुद्रा का बड़ा इनफ्लो हुआ है।

RBI का रुख और बैंकों की रणनीति

इस अतिरिक्त नकदी को संभालने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार 'वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो' (VRRR) ऑक्शन का सहारा ले रहा है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि बैंक लंबी अवधि (जैसे 7 दिन) के लिए पैसा पार्क करने में हिचकिचा रहे हैं। इसके बजाय, बैंकों के ट्रेजरी हेड्स की प्राथमिकता 'ओवरनाइट' (रातों-रात) लिक्विडिटी पर है, ताकि अचानक क्रेडिट डिमांड बढ़ने पर वे तुरंत फंड्स का इस्तेमाल कर सकें।

निवेशकों के लिए चुनौतियां: मार्जिन और रिस्क

ज्यादा लिक्विडिटी का मतलब हमेशा बैंक के लिए अच्छा नहीं होता। जब बैंकों के पास पैसा ज्यादा होता है और वे इसे तेजी से उधार नहीं दे पाते, तो यह कम रिटर्न देने वाली एसेट्स में फंसा रहता है। इसका सीधा दबाव बैंकों के 'नेट इंटरेस्ट मार्जिन' (NIMs) पर पड़ता है। अगर यह स्थिति बनी रही, तो बैंकों के लिए डिपॉजिट कॉस्ट के मुकाबले इंटरेस्ट स्प्रेड बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

इसके अलावा, लिक्विडिटी का वितरण भी समान नहीं है। अक्सर यह बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के पास केंद्रित होती है, जबकि छोटे बैंकों की स्थिति अलग हो सकती है।

आगे क्या होगा?

बैंकिंग सेक्टर के लिए अब क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार सबसे महत्वपूर्ण है। यदि मार्केट में कर्ज की मांग बढ़ती है, तो यह लिक्विडिटी सरप्लस अपने आप कम हो जाएगा। लेकिन अगर डिमांड सुस्त रही, तो RBI को लिक्विडिटी सोखने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। निवेशकों को अब RBI के आगामी ऑक्शन और तिमाही नतीजों में बैंकों की कमेंट्री पर कड़ी नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.