Banking Liquidity: भारतीय बैंकिंग सिस्टम में नकदी का सैलाब, **₹5.05 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंची लिक्विडिटी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Banking Liquidity: भारतीय बैंकिंग सिस्टम में नकदी का सैलाब, **₹5.05 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंची लिक्विडिटी

भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी (Surplus Cash) **₹5.05 लाख करोड़** के पार पहुंच गई है, जो मध्य अप्रैल के बाद का उच्चतम स्तर है। सरकारी खर्च और विदेशी मुद्रा जमा में वृद्धि के कारण आई इस नकदी से बैंकों को लोन बांटने में मदद मिलेगी।

नकदी बढ़ने की असली वजह

बैंकिंग सिस्टम में आई इस भारी नकदी के पीछे मुख्य तौर पर सरकारी खर्च का हाथ है। महीने के अंत में सैलरी और पेंशन के भुगतान के चलते सिस्टम में बड़ी मात्रा में पैसा आया है। इसके साथ ही, फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट में आई तेजी ने भी आग में घी का काम किया है। RBI की खास सुविधा के तहत बैंकों ने इन विदेशी फंड्स को रुपये में बदलकर लिक्विडिटी को काफी बढ़ा दिया है।

RBI का 'बैलेंसिंग एक्ट'

सिस्टम में ज्यादा लिक्विडिटी होना बैंकिंग के लिए अच्छा है, लेकिन इससे शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों में अस्थिरता आ सकती है। इसे कंट्रोल करने के लिए RBI सक्रिय रूप से Variable Rate Reverse Repo ऑक्शन का इस्तेमाल कर रहा है ताकि अतिरिक्त नकदी को सिस्टम से सोखा जा सके और रेपो रेट के साथ तालमेल बिठाया जा सके।

आगे क्या होगा?

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि साल के अंत तक यह सरप्लस कम हो सकता है। टैक्स आउटफ्लो और फेस्टिव सीजन की डिमांड को देखते हुए लिक्विडिटी में गिरावट संभव है। निवेशकों के लिए अब सबसे जरूरी है कि वे बैंकों के Credit-Deposit Ratio पर नजर रखें। बैंक लोन तो बांट रहे हैं, लेकिन क्या वे उसी रफ्तार से डिपॉजिट जुटा पा रहे हैं? यह आने वाले समय में बैंकों की फंडिंग पर बड़ा असर डालेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.