जून 2026 में महिला कर्जदारों के लिए बैंक क्रेडिट में **19.7%** की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के **12.9%** के मुकाबले काफी अधिक है। कुल बैंक क्रेडिट **16.5%** बढ़ गया है, जिसका नेतृत्व प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने किया है।
बैंकिंग सेक्टर का नया ट्रेंड
Reserve Bank of India (RBI) के लेटेस्ट 'बेसिक स्टैटिस्टिकल रिटर्न' डेटा के अनुसार, जून 2026 तक देश भर में कर्ज की मांग में भारी तेजी देखी गई है। रिटेल सेगमेंट में पर्सनल लोन और छोटे लोन की मांग में उछाल साफ तौर पर दिख रहा है।
बैंकों का परफॉर्मेंस
पूरी इकोनॉमी में बैंक क्रेडिट सालाना 16.5% की दर से बढ़ा है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 9.9% था। इस विस्तार में प्राइवेट सेक्टर बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों की भूमिका सबसे बड़ी रही है, जहां क्रेडिट डिस्बर्समेंट में क्रमशः 20.5% और 25.1% की ग्रोथ देखी गई। पब्लिक सेक्टर बैंकों ने भी 17.3% की बढ़त दर्ज की है। वहीं, कॉरपोरेट सेक्टर में भी रिकवरी आई है और मांग 21.1% तक पहुंच गई है।
मार्जिन पर दबाव का रिस्क
बाजार के लिए एक चिंता का विषय 'लिक्विडिटी मिसमैच' है। फिलहाल क्रेडिट ग्रोथ तो तेज है, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ लगभग 15% पर ही अटकी हुई है। जब लोन की मांग डिपॉजिट से तेज गति से बढ़ती है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत (Cost of funds) बढ़ जाती है, जो भविष्य में उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
क्या है भविष्य की चुनौती?
फिलहाल, लगभग दो-तिहाई बैंक लोन 9% से कम ब्याज दर पर उपलब्ध हैं। लेकिन ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव घरेलू महंगाई और GDP ग्रोथ के लिए जोखिम बने हुए हैं। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि बैंक अपनी एसेट क्वालिटी और लिक्विडिटी को इस आक्रामक विस्तार के साथ कैसे बैलेंस करते हैं।
